अब उपचुनाव में कांग्रेस ने थरूर को नहीं बुलाया
कांग्रेस ने की शशि थरूर की अनदेखी
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने अब शशि थरूर की अनदेखी करना शुरू कर दिया है. केरल के निलांबुर विधानसभा के लिये हो रहे उपचुनाव में शशि थरूर को नहीं बुलाया गया है. शशि थरूर कांग्रेस के तिरुवनंतपुरम के सांसद हैं. हाल ही में जब मोदी सरकार ने कांग्रेस से चर्चा करे बगैर शशि थरूर को 'ऑपरेशन सिंदूर' पर भारत का पक्ष रखने वाले प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई शशि थरूर को सौंपी थी तब से पार्टी से उनका मतभेद खुलकर सामने आ गया.
शशि थरूर ने संकेत दिये हैं कि निलांबुर उपचुनाव के बाद वे पार्टी नेतृत्व से बात करेंगे. हालांकि, उन्होने यह साफ नहीं किया कि उनके मतभेद पार्टी आलाकमान से है या फिर स्थानीय नेतृत्व से है. बता दें कि शशि थरूर कांग्रेस के एक बड़े नेता हैं तथा उनके द्वारा किये गये ट्वीट समाचार बनते रहते हैं.
शशि थरूर ने मलयालम में कहा, "आप जानते हैं कि मौजूदा कांग्रेस नेतृत्व के साथ मेरे कुछ मतभेद रहे हैं. कई बातें सार्वजनिक हैं. लेकिन ये मेरे लिये बेहतर होगा कि मैं सीधे पार्टी के अंदर ही बात करूं. आज इस तरह की चर्चा का दिन नहीं है. मेरे दोस्त और यहां (निलांबुर) के प्रत्याशी को चुनाव जीतने देते हैं."
निलांबुर उपचुनाव में न बुलाने पर उन्होंने कहा, "अभी तक तो मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया है. लेकिन कोई बात नहीं. जब समय आयेगा, जब ज़रूरत होगी तो हम एक-दूसरे से बात कर लेंगे." उनके बात रखने के ढ़ंग से साफ है कि वे निलांबुर उपचुनाव के कैंपेन में अनदेखी किये जाने के बावजूद मतभेदों पर खुलकर कहने के बजाये संकेत देना पसंद कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "कांग्रेस के मूल्य और कांग्रेस के कार्यकर्ता मेरे काफ़ी क़रीब हैं. मैं अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 16 सालों से काम कर रहा हूं. मैंने उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और आदर्शवाद देखा है. मुझे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पार्टी के बीच प्रेम और दोस्ती पर कोई शक नहीं है. ये हमेशा बरकरार रहेगा."
गौरतलब है कि पहलगाम हमले के बाद हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की स्थिति को वैश्विक मंचों पर रखने के लिये कुल सात प्रतिनिधिमंडल बनाये थे. इनमें से एक की अगुवाई शशि थरूर को सौंपी गई थी.
उस समय शशि थरूर ने एक्स पर लिखा था, ''सरकार द्वारा मुझे 5 प्रमुख देशों में जाने वाले प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व करने का आमंत्रण मिला, इसके लिये मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं. जब बात राष्ट्रीय हित की हो और मेरी ज़रूरत हो, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा."
कांग्रेस को क़रीब से जानने वाले वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई शशि थरूर के बयानों पर कहते हैं, "शशि थरूर की उम्र 69 साल हो चुकी है. वो अपने राजनीतिक अस्तित्व को खोज रहे हैं. अपने आप को वो केरल के मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं. केरल में अगले साल चुनाव है लेकिन उसके बाद जो चुनाव होगा, तब उनकी उम्र 75 के करीब होगी. इसलिए वो अभी राजनीतिक दांव खेलना चाह रहे हैं और उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश नहीं किया जा रहा. यही उनकी नाराज़गी का मूल कारण है."