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पर्यावरण मंत्रालय से 4 अधिकारी हटाने पर कांग्रेस बोली- 'प्रवचन मंत्रालय'

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09 जुल. 2026, 06:43 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

जयराम रमेश
जयराम रमेश

नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के चार बेहद करीबी सहयोगियों को अचानक पद से हटाए जाने के बाद देश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है और इसे एक 'महाघोटाला' करार दिया है.


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि जून 2025 से ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और राजस्थान सरकार मिलकर सरिस्का (अलवर) के संवेदनशील बाघ अभयारण्य की सीमाओं को बदलने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं. 


उन्होंने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि क्षेत्र में बंद हो चुकी 50 से अधिक खनन कंपनियों को दोबारा काम शुरू करने का मौका मिल सके.


जयराम रमेश के मुताबिक, 20 सितंबर 2025 को फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) ने मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अरावली पहाड़ियों की परिभाषा बदलने का कड़ा विरोध किया था, क्योंकि इससे यह पूरी पर्वत श्रृंखला खनन और रियल एस्टेट कारोबारियों के लिए खुल जाएगी. 


उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) और एमिकस क्यूरी ने भी FSI की इस राय का समर्थन किया था, लेकिन इसके बावजूद मंत्रालय इस परिभाषा को बदलने पर अड़ा रहा. कांग्रेस का आरोप है कि अब इन चारों अधिकारियों की अचानक हुई विदाई इसी बड़े फेरबदल और कथित घोटाले का नतीजा है.


सूत्रों के अनुसार, हटाए गए सहयोगियों में सिद्धार्थ यादव शामिल हैं, जिन्हें जून 2024 में मंत्री के निजी स्टाफ में शामिल किया गया था और वे मुख्यमंत्री कार्यालय, नौकरशाही और अन्य कैबिनेट मंत्रियों के बीच संवाद का एक मुख्य जरिया थे. 


उनके अलावा निजी सचिव अमर सिंह, अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह और आयुष सरन को भी उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है. मंत्रालय ने अभी तक इन अधिकारियों को हटाने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है, बस इसे प्रशासनिक आधार और नियुक्ति समाप्ति की कार्रवाई बताया है.


कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जब किसी बड़े मंत्रालय के दफ्तर में रातों-रात इतनी बड़ी सफाई होती है, तो जनता को यह जानने का पूरा हक है कि आखिर परदे के पीछे क्या छिपाया जा रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. 


कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि देश में पर्यावरण और जंगलों की रक्षा करने में नाकाम रहने वाला यह 'पर्यावरण मंत्रालय' अब सिर्फ 'प्रवचन मंत्रालय' बनकर रह गया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP