शिक्षा के बढ़ते खर्च से बेहाल आम जनता: कांग्रेस
नई दिल्ली । डेस्क: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था के गहराते संकट पर गंभीर चिंता जताई है. पार्टी ने कहा है कि हाल के दिनों में जंतर-मंतर सहित देश भर में छात्रों द्वारा किए गए प्रदर्शनों की तात्कालिक वजह भले ही लीक और धांधली से भरी परीक्षा प्रणाली रही हो, लेकिन युवाओं और उनके माता-पिता के आक्रोश की असली वजह शिक्षा की घटती पहुंच और इसकी लगातार बढ़ती लागत है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के 2014-15 से 2025-26 तक के घरेलू खर्च विश्लेषण का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की. उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में शिक्षा पर होने वाला खर्च लोगों की घरेलू आय की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है.
नतीजतन, परिवारों को अपनी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर मजबूरन खर्च करना पड़ रहा है.
विश्लेषण के अनुसार, प्राइवेट कोचिंग और ट्यूशन फीस घरेलू खर्च के सबसे तेजी से बढ़ने वाले घटकों में से एक बनकर उभरे हैं. इसके अलावा स्कूल और कॉलेज की फीस में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो लगातार आमदनी की वृद्धि दर से आगे बनी हुई है.
इतना ही नहीं, किताबों और अध्ययन सामग्री पर होने वाला खर्च भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है. यह प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी, महंगी संदर्भ पुस्तकों और पूरक शिक्षण संसाधनों की बढ़ती लागत को दर्शाता है.
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की गलत नीतियों के कारण आज हर वर्ग का परिवार शिक्षा के भारी-भरकम बोझ तले दबा हुआ है. देश के युवा और अभिभावक इस बेतहाशा बढ़ती महंगाई और असमानता से राहत के लिए तत्काल सुधारात्मक कदमों की मांग कर रहे हैं.