वाणिज्यिक कर निरीक्षक पदोन्नति घोटाला: 42 कर्मचारियों का डिमोशन
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में वर्ष 2021 और 2022 के दौरान आयोजित की गई सीमित भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा हुआ है. राज्यकर आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा द्वारा जारी कड़े निर्देशों के तहत वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर पदोन्नत हुए 42 कर्मचारियों की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए उन्हें उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है.
प्रभावित कर्मियों की नई पदस्थापना सूची जारी करने के साथ ही विभाग ने संभावित कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए उच्च न्यायालय में कैविएट भी दायर कर दी है.
यह पूरी कार्रवाई विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. तत्कालीन आयुक्त समीर विश्नोई के कार्यकाल में हुई इस भर्ती प्रक्रिया के लिए गठित चयन समिति में अपर आयुक्त कल्पना तिवारी, टीआर धुर्वे और सहायक आयुक्त रौशन सिंह शामिल थे.
चौंकाने वाली बात यह है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारियां छुपाने के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी और जनसूचना अधिकारी की जिम्मेदारी भी उन्हीं अफसरों को सौंपी गई थी जो खुद चयन प्रक्रिया में शामिल थे.
जांच में परीक्षा प्रणाली और अभ्यर्थियों की योग्यता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, औपचारिक परिणाम घोषित किए बिना ही सीधे चयन सूची जारी कर दी गई थी.
उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में अंकों का हेरफेर, आरक्षण नियमों का उल्लंघन और परीक्षा सामग्री को बिना सील किए केंद्रों तक भेजना पाया गया. अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में एक जैसी लिखावट पाई गई और डॉ. खूबचंद बघेल पर लिखे निबंध के जवाब मॉडल उत्तर से हूबहू मेल खाते थे. गलत जवाबों पर भी अंक दिए गए थे, जबकि उपस्थिति का रिकॉर्ड तक गायब कर दिया गया था.
इसके अलावा अपात्र अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए कटऑफ तिथि के नियमों को ताक पर रखकर अर्हता तिथि में बदलाव किए गए. इसके चलते स्नातक की अर्हता पूरी न करने वाले कई कर्मी भी पदोन्नति पा गए और भृत्य पद से करियर शुरू करने वाले कुछ कर्मचारी लिपिक से सीधे वाणिज्यिक कर निरीक्षक पद तक पहुंच गए थे.
अब विभाग ने इन सभी गड़बड़ियों को आधार बनाते हुए यह बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है.