CJI जस्टिस सूर्यकांत ने डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया
रायपुर । संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया. इस दौरान उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस प्रशांत कुमार, बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम सहित कई अन्य न्यायाधीश उपस्थित रहे.
आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने सभी अतिथियों का पारंपरिक बीरनमाला से आत्मीय स्वागत किया और उन्हें स्मृति स्वरूप जनजातीय भित्ति चित्र भेंट किए.
संग्रहालय के अवलोकन के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आंदोलनों और उनकी शौर्य गाथाओं को करीब से देखा.
उन्होंने विशेष रूप से 1910 के ऐतिहासिक 'भूमकाल विद्रोह' और इसके जननायक गुंडाधुर के साहस की प्रशंसा की.
इसके साथ ही उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार और विद्रोह के समय उपयोग किए गए अन्य पारंपरिक शस्त्रों का भी निरीक्षण किया. जस्टिस सूर्यकांत ने इस संग्रहालय को अद्वितीय बताते हुए कहा कि यह देश के नागरिकों को जनजातीय इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ शोषण और अन्याय के विरुद्ध एकजुट होने की प्रेरणा देता है.
संग्रहालय की तकनीकी विशेषताओं से प्रभावित होकर न्यायाधीशों ने साल, साजा और महुआ के उन प्रतीकात्मक डिजिटल वृक्षों की सराहना की, जो एक कथावाचक की तरह जनजातीय विद्रोहों का इतिहास बताते हैं.
जस्टिस सूर्यकांत ने यहाँ स्थापित मां दंतेश्वरी के डिजिटल मंदिर में दर्शन किए और भविष्य में स्वयं दंतेवाड़ा जाकर माता के साक्षात दर्शन करने की इच्छा भी जताई.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को राज्योत्सव के अवसर पर इस संग्रहालय का उद्घाटन किया था. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश और प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा के मार्गदर्शन में तैयार यह संग्रहालय अब अपनी लोकप्रियता के कारण दूसरे चरण के विस्तार की ओर बढ़ रहा है.