बकाया इंसेंटिव को लेकर छत्तीसगढ़ में CHOs का 5 नवंबर को स्वास्थ्य भवन घेराव का ऐलान
छत्तीसगढ़ के कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHOs) ने बकाया इंसेंटिव और कार्य संबंधी समस्याओं को लेकर 5 नवंबर को नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन के घेराव का ऐलान किया है.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHOs) अपनी लंबित इंसेंटिव राशि के भुगतान, कैडर के खिलाफ कथित दंडात्मक कार्रवाई और कार्य-संबंधी बढ़ती समस्याओं के विरोध में 5 नवंबर को नवा रायपुर स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय 'स्वास्थ्य भवन' का घेराव करेंगे. छत्तीसगढ़ प्रदेश कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर संघ ने शासन और NHM अधिकारियों से समयबद्ध हस्तक्षेप की मांग करते हुए राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है.
संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, तय दिशा-निर्देशों के तहत हर महीने मिलने वाले इंसेंटिव के लिए CHOs को पिछले तीन-चार सालों से बार-बार प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने पड़ रहे हैं.
नियमत: हर महीने की 10 तारीख तक PLP पोर्टल के जरिए सत्यापन पूरा कर भुगतान करने के निर्देश हैं, लेकिन जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की लापरवाही तथा पोर्टल की गड़बड़ियों की वजह से महीनों से भुगतान अटका हुआ है.
संघ ने कथित इंसेंटिव घोटाले की जांच में CHOs पर की जा रही चयनात्मक कार्रवाई का भी विरोध किया है. संघ का कहना है कि इंसेंटिव का भुगतान उप-स्वास्थ्य केंद्रों के प्रदर्शन और स्वास्थ्य सूचकांकों पर आधारित होता है, इसलिए जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और इसमें संबंधित सभी कर्मियों की भूमिका व रिकॉर्ड शामिल किए जाने चाहिए.
CHOs संघ की पांच प्रमुख मांगें:
1- अनुचित आदेशों को रद्द या संशोधित करना और पिछले 7-8 महीनों से लंबित इंसेंटिव जारी करना.
2- इंसेंटिव को मूल वेतन में मिलाना (विलय करना).
3- उप-स्वास्थ्य केंद्र के सभी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट कार्य-दिशा-निर्देश (Terms of Reference) और काम का समान विभाजन.
4-सुकमा जिले में कथित अनियमित इंसेंटिव भुगतान की जांच और अंतर राशि तुरंत जारी करना.
5- सत्यापन और भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई.
प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने में CHOs की मुख्य भूमिका है, लेकिन उनकी आर्थिक सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है. यदि 5 नवंबर से पहले मांगें पूरी नहीं हुईं तो व्यापक और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा.