छत्तीसगढ़ में मौसम बदला, जशपुर में बिजली गिरने से मौत
छत्तीसगढ़ में मौसम मेहरबान लेकिन खेती को नुकसान
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में इन दिनों मौसम थोड़ा बदला हुआ है. बीते एक दिन में कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है, जिससे तापमान सामान्य से नीचे चला गया है.
रायगढ़ में रात को गरज और चमक के साथ बारिश हुई, वहीं बलरामपुर और रामानुजगंज में तेज आंधी, बारिश और ओले भी गिरे.
इधर जशपुर जिले के दुलदुला में एक दुखद घटना हुई, जब बिजली गिरने से मजदूर सनऊ राम (51) की मौके पर ही मौत हो गई. साथ में मौजूद 25 वर्षीय रेखा घायल हो गईं. उन्हें इलाज के बाद खतरे से बाहर बताया गया है. सनऊ अपने परिवार के साथ ईंट भट्ठे में मजदूरी करने आया था और अस्थायी मकान में रह रहा था. वह मूल रूप से सक्ती जिले के ग्राम डोमा का निवासी था.
रायगढ़ जिले में मौसम की वजह से एक और घटना सामने आई. बिलासपुर जलाशय का गेट टूट गया, जिससे जलाशय का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग और आसपास के खेतों में फैल गया. इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और इलाके में पानी का दबाव बढ़ गया. प्रशासन की टीम और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पानी के बहाव को रोकने की कोशिश में जुटे हैं. शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने सिंचाई के लिए गेट खोला था, लेकिन लंबे समय से गेट की मरम्मत और देखभाल न होने के कारण उसकी खराब स्थिति इस घटना का मुख्य कारण बनी.
मौसम विभाग के अनुसार, आज राज्य के कुछ हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं. कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना भी है. अगले 48 घंटों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद दो से तीन दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं, अगले दो दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है.
प्रदेश में सर्वाधिक तापमान दुर्ग में 37.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान जगदलपुर में 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से आ रही नमी वाली हवाएं राज्य के ऊपर असर डाल रही हैं. मध्य प्रदेश में बने चक्रवाती घेरा और आंध्र प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवात राज्य में हवाओं में अस्थिरता पैदा कर रहा है. इन कारणों से रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में बादल घने रहेंगे और जमीन गर्म रहने के बावजूद ऊपर से ठंडी नमी वाली हवाएं मिलने से तेज़ हवाएं चलेंगी और बारिश हो सकती है. कुछ सीमावर्ती इलाकों में ओलावृष्टि का भी खतरा है.
कृषि क्षेत्र पर इसका असर पहले ही दिखने लगा है. बस्तर और दुर्ग संभाग में जहां 10 मिमी या उससे अधिक बारिश हुई है, वहां रबी की फसलें जैसे गेहूं और चना भीगने का खतरा बढ़ गया है. ओले गिरने से कटाई के लिए तैयार फसलें खराब हो सकती हैं. आम के बौर और दलहनी फसलों को भी बिन मौसम की बारिश और तेज हवाओं से नुकसान होने का खतरा है, क्योंकि इससे फूल और पत्तियां झड़ सकती हैं.
इस मौसम के मद्देनजर प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और खुले मैदान, बिजली के खंभों और जल निकासी वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है. किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करने और बारिश की जानकारी पर ध्यान देने को कहा गया है.