मेकाहारा में एक बिस्तर पर 2 मरीज, HC ने स्वतः संज्ञान लिया
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान मेकाहारा अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था ने एक बार फिर सिर उठाया है. हाईकोर्ट ने हाल ही में समाचार पत्र पर प्रकाशित हुई एक चौंकाने वाली तस्वीर पर खुद से संज्ञान लेते हुए इसे अत्यंत दुखद करार दिया है.
इस तस्वीर में अस्पताल के महिला वार्ड में एक ही बेड पर दो नवजात शिशुओं समेत उनकी मांओं को लेटे हुए दिखाया गया था, जो स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का जीता-जागता प्रमाण बन गया.
कोर्ट ने मेकाहारा की समग्र स्थिति को 'निराशाजनक' बताते हुए राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
न्यायाधीशों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसी घटनाएं मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध हैं और तत्काल सुधार की आवश्यकता है.
शासन को 6 नवंबर तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है, जिसमें अस्पताल की सुविधाओं में सुधार के ठोस कदमों का उल्लेख अनिवार्य होगा.
यह मामला न केवल चिकित्सा व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है.
पिछले कुछ महीनों में मेकाहारा को लेकर हाईकोर्ट की ओर से कई कड़े निर्देश जारी हो चुके हैं. याद रहे, कुछ समय पूर्व अस्पताल में एक नवजात के सामने 'मेरी मां एचआईवी पॉजिटिव है' लिखा बोर्ड लगाए जाने की घटना ने कोर्ट को स्तब्ध कर दिया था. इसे अमानवीय बताते हुए अदालत ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया था.
फिर भी, इन दोषारोपणों के बावजूद सुधार के संकेत नजर नहीं आ रहे, जो राज्य की स्वास्थ्य नीति पर गंभीर सवाल उठाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि मेकाहारा जैसे प्रमुख अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव न केवल मरीजों की जान जोखिम में डाल रहा है, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी आंच ला रहा है.