तेंदूपत्ता संग्राहक की पत्नी को 4 लाख मुआवजा
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जिला सहकारी संघ और वन उत्पाद समिति को एक तेंदूपत्ता संग्राहक के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है. आयोग ने सेवा में कमी का हवाला देते हुए राजनांदगांव जिला उपभोक्ता आयोग के पिछले फैसले को पलट दिया और कहा कि दावेदार का योजना की जानकारी न होना उचित था.
मामला खैरागढ़-छुईखदान जिले के गोपालटोला, सल्हेवारा निवासी कोमल पटेल की पत्नी संतोशी पटेल का है. कोमल 2019 से 2021 तक सल्हेवारा वन उत्पाद समिति के साथ पंजीकृत तेंदूपत्ता संग्राहक थे. 11 अक्टूबर 2021 को उनकी करंट लगने से मृत्यु हो गई थी.
शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये और दुर्घटना में मृत्यु पर अतिरिक्त 2 लाख रुपये का मुआवजा नामांकित व्यक्ति को मिलता है. संतोशी ने 2 जुलाई 2022 को दावा प्रस्तुत किया, लेकिन समिति ने 90 दिन की समय सीमा पार होने का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया.
संतोशी पटेल ने इस फैसले को जिला उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी, लेकिन वहां भी समिति के पक्ष में फैसला हुआ. इसके बाद, उन्होंने राज्य आयोग में अपील की. जस्टिस गौतम चौड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की और संतोशी के दावे को जायज ठहराया.
आयोग ने पाया कि संग्राहक के पारिश्रमिक कार्ड में कई बीमा योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, आम आदमी बीमा योजना, अटल समूह बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजन का उल्लेख था, लेकिन शहीद महेंद्र कर्मा योजना का जिक्र नहीं था. इसलिये, संतोशी का इस योजना की जानकारी न होना स्वाभाविक था.
आयोग ने आदेश दिया कि संतोशी को दुर्घटना मृत्यु के तहत 4 लाख रुपये का मुआवजा एक महीने के भीतर दिया जाये, साथ ही 6 अक्टूबर 2023 से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक साधारण ब्याज भी दिया जाये. इसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा के लिए 20,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिये 10,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया गया है.
यह फैसला तेंदूपत्ता संग्राहकों के अधिकारों की रक्षा और योजनाओं की जानकारी के अभाव में उनके हितों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.