छत्तीसगढ़ में बन रहा है सड़कों का मजबूत जाल
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में दो इकोनॉमिक कॉरिडोर सहित राज्य के दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों में सड़कों का मजबूत नेटवर्क बनाने का काम शुरू हो गया है. छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का भी निर्णय लिया गया है.
राज्य सरकार ने दावा किया है कि विशाखापट्टनम के पोर्ट के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलेगा, साथ ही रोजगार के नये अवसर भी बनेंगे. रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, इस 6 लेन सड़क की लंबाई के 124 किलोमीटर होगी. इस मार्ग के लिए 4146 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है तथा निर्माण कार्य प्रगति पर है.
रायपुर एवं बिलासपुर को झारखण्ड की औद्योगिक नगरी रांची और धनबाद से जोड़ने के लिए 4 लेन सड़क का बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी लंबाई 157 किलोमीटर और लागत 4007 करोड़ रुपये है.
राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा, भारत सरकार ने 2014 से 2025 तक केंद्रीय सड़क और सी.आर.आई.एफ. और इकनोमिक इंपोर्टेंस एवं इंटर स्टेट कनेक्टिविटी के तहत राज्य की सड़कों के विकास के लिए कुल 3826 करोड़ रुपये की लागत के 70 कार्यों को मंजूरी दी है.
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में राजमार्गों के नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है. रायपुर एवं दुर्ग शहर के नागरिकों को सघन एवं भारी यातयात से राहत पहुंचाने हेतु 2 पैकेजों में 92 किलोमीटर लंबाई वाला 6 लेन का रायपुर-दुर्ग बाईपास का भी निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी लागत 2289 करोड़ रूपये है.
राष्ट्रीय राजमार्गों के आस-पास औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कोरबा-बिलासपुर इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर के निर्माण का निर्णय लिया गया है.
उरगा-कटघोरा बाईपास बसना से सारंगढ़ (माणिकपुर) फीडर रूट, सारंगढ़ से रायगढ़ फीडर रूट और रायपुर-लखनादोन आर्थिक गलियारा परियोजनाओं की कुल लंबाई 236.1 किलोमीटर है, जिसके लिये भारत सरकार ने कुल 9208 करोड़ स्वीकृत किया है.
केन्द्रीय सड़क निधि से सड़कों के निर्माण के लिए 908 करोड़ रूपए स्वीकृति दी गई है.