शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

छत्तीसगढ़: 1,000 छात्र भी नहीं जुटा पा रहे 1/3 निजी विश्वविद्यालय

C

CG Khabar

05 सित. 2026, 03:25 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

रमेन डेका
रमेन डेका

रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के स्तर और निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. राज्य में संचालित लगभग एक-तिहाई निजी विश्वविद्यालय न्यूनतम 1,000 विद्यार्थियों का नामांकन भी हासिल करने में नाकाम साबित हुए हैं. इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यपाल रामेन डेका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो संस्थान केवल नाम के विश्वविद्यालय बने हुए हैं, उन्हें अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी.


लोक भवन में करीब 20 निजी विश्वविद्यालयों के मुख्य कुलपतियों (वीसी) के साथ आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया. लगभग आधा दर्जनों ऐसे विश्वविद्यालय पाए गए, जहां छात्रों की कुल संख्या 1,000 से भी कम है. 


इस पर नाराजगी जताते हुए राज्यपाल ने कड़ा निर्देश दिया कि सभी विश्वविद्यालय तत्काल प्रभाव से कम से कम 1,000 छात्रों के नामांकन का न्यूनतम स्तर हासिल करें, अन्यथा उनकी संस्थागत साख और संचालन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे.


इस खुलासे के बाद शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि एक औसत हायर सेकेंडरी स्कूल से भी कम छात्र संख्या के साथ विश्वविद्यालय चलाना उच्च शिक्षा की साख के साथ खिलवाड़ है. यदि छात्र संख्या इतनी ही कम है, तो इन्हें विश्वविद्यालय के बजाय कॉलेज के रूप में संचालित होना चाहिए. 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भी बड़े और बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) संस्थानों की वकालत करती है. एनईपी के तहत 3,000 से अधिक छात्रों वाले कॉलेजों को स्वायत्त विश्वविद्यालय बनाने का लक्ष्य है, जबकि यहां पहले से स्थापित विश्वविद्यालय उसका एक-तिहाई आंकड़ा भी नहीं छू पा रहे हैं.


यह स्थिति छत्तीसगढ़ के निजी उच्च शिक्षा क्षेत्र में बिना मांग वाले और अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों की भरमार को उजागर करती है. राज्यपाल ने संदिग्ध पीएचडी पंजीकरणों की विशेषज्ञ जांच कराने और अनुपयोगी पाठ्यक्रमों को बंद करने के भी आदेश दिए हैं. अब 1,000 छात्रों का यह आंकड़ा इन संस्थानों के लिए महज एक लक्ष्य नहीं, बल्कि अस्तित्व बचाने की शर्त बन चुका है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP