आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को टेस्ट ट्यूब बेबी की सुविधा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बस्तर क्षेत्र में अब एक नई पहल शुरू होने जा रही है. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए टेस्ट ट्यूब बेबी की सुविधा प्रदान करने का फैसला किया है.
यह कदम उन माओवादी जोड़ों के लिए है जो परिवार शुरू करना चाहते हैं, लेकिन रिवर्स वासेक्टॉमी की असफलता के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि माओवादी आंदोलन में पुरुष कैडर को शादी से पहले अनिवार्य रूप से नसबंदी करानी पड़ती थी, ताकि वे परिवार पालने की "विचलन" से मुक्त रहें. यह प्रक्रिया अक्सर गैर-प्रशिक्षित लोगों द्वारा की जाती थी.
विजय शर्मा ने कहा, "आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को रिवर्स वासेक्टॉमी की सुविधा दी गई है, लेकिन कुछ मामलों में यह असफल रही है. उनकी सामान्य जीवन जीने और माता-पिता बनने की इच्छा को देखते हुए, हमने उन्हें आईवीएफ प्रक्रिया की सुविधा देने का निर्णय लिया है."
2007 से अब तक बस्तर में 26 आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की रिवर्स वासेक्टॉमी की गई, जिनमें से 10 जोड़ों ने 12 बच्चों को जन्म दिया. सरकार ने अप्रैल 2025 में 'नक्सल आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति 2025' बनाई है, जिसके तहत इस तरह की चिकित्सा सुविधाओं का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.
शर्मा ने आगे कहा, "माओवादी आंदोलन में जोड़ों को शादी की अनुमति तो दी जाती है, लेकिन इसके साथ शर्तें होती हैं. पुरुष कैडर की सहमति से नसबंदी की जाती है, ताकि वे संगठन के 'महत्वपूर्ण कार्यों' पर ध्यान दे सकें." आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का कहना है कि खतरों और व्यक्तिगत बलिदानों से भरे जीवन से बाहर निकलने का मुख्य कारण "पारिवारिक जीवन का आनंद लेना" है.
इसीलिए सरकार अब आधुनिक चिकित्सा सहायता के माध्यम से उनकी मदद कर रही है.