छत्तीसगढ़ : स्कूलों में अनिवार्य हुआ राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और भोजन मंत्र
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना का संचार करने के लिए राज्य के सभी शासकीय व निजी विद्यालयों के लिए एक नया और सख्त नीतिगत निर्देश जारी किया है. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किए जा रहे इस आदेश के तहत अब हर स्कूल में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और विभिन्न मंत्रों का सामूहिक पाठ पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है.
मंत्रालय महानदी भवन से इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को कड़े निर्देश भेजकर इसे तुरंत जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है. शासन ने साफ कर दिया है कि इन नियमों की अनदेखी करने वाले प्राचार्यों और स्कूल प्रबंधन पर सख्त प्रशासनिक गाज गिरेगी, जिसके लिए अधिकारियों को लगातार औचक निरीक्षण करने को कहा गया है.
इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे दिन के शेड्यूल को तीन विशेष भागों में विभाजित किया गया है.
सबसे पहले, सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान एक निश्चित क्रम में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का पाठ होगा, जिसके साथ ही महान विभूतियों की जीवन गाथाएं भी पढ़कर सुनाई जाएंगी.
इसके बाद, दोपहर में लंच टाइम के दौरान सभी छात्र एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का उच्चारण करेंगे. अंत में, स्कूल की छुट्टी होने से ठीक पहले संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के सामूहिक वाचन के साथ दिन का समापन किया जाएगा.
शिक्षा विभाग का मुख्य ध्येय इस अनूठी पहल के जरिए स्कूली बच्चों को अपनी समृद्ध भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक चेतना और अनुशासन से गहराई से जोड़ना है. अधिकारियों के मुताबिक, रोजमर्रा की पढ़ाई के साथ इन सांस्कृतिक व शैक्षणिक गतिविधियों के समन्वय से छात्रों में देशप्रेम की भावना मजबूत होगी और उनका सर्वांगीण नैतिक विकास हो सकेगा.
यही वजह है कि सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में भारतीय मूल्यों को शामिल करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम मान रही है. Symbolic Photo.