छत्तीसगढ़: महासमुंद बना गांजा तस्करी का गढ़
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला ओडिशा से होने वाली गांजा तस्करी के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरा है, जहां पुलिस ने इस साल के शुरुआती चार महीनों में ही अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक 5,630 किलोग्राम से अधिक गांजा जब्त किया जा चुका है, जिसकी कुल कीमत 28.09 करोड़ रुपये है.
यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग 600 प्रतिशत अधिक है, जो यह स्पष्ट करता है कि तस्करी का जाल इस क्षेत्र में कितनी मजबूती से फैला हुआ है. पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि बीते साल इसी अवधि में केवल 816 किलोग्राम गांजा पकड़ा गया था, लेकिन इस साल तस्करों की सक्रियता और पुलिस की सख्ती, दोनों में भारी इजाफा हुआ है.
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने इस नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया कि जनवरी से अप्रैल के बीच कुल 72 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 187 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है.
गौर करने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से 135 बाहरी राज्यों के हैं, जो महासमुंद को एक सुरक्षित 'ट्रांजिट कॉरिडोर' के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे.
तस्करों ने ओडिशा के 11 जिलों से गांजा लाकर उसे छत्तीसगढ़ के रास्ते महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों तक पहुंचाने का पूरा तंत्र विकसित कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि यह खेप छोटे पैकेटों में बेची जानी थी, जो लाखों लोगों को नशे की गिरफ्त में ले सकती थी.
तस्करी के इस गढ़ में अपराधी पुलिस को चकमा देने के लिए बेहद शातिर तरीके अपना रहे हैं. जांच में सामने आया है कि गाड़ियों के इंजन, दरवाजों और सीटों के नीचे गुप्त जगह बनाने के अलावा, अब एम्बुलेंस और परिवार के साथ सफर करने जैसी तरकीबों का इस्तेमाल हो रहा है ताकि किसी को शक न हो.
कई मामलों में फलों और कोयले की आड़ में नशीले पदार्थों की बड़ी खेप ले जाई जा रही थी. महासमुंद पुलिस ने साफ किया है कि इस अवैध व्यापार की जड़ें काटने के लिए जिले में नाकेबंदी और निगरानी और सख्त की जाएगी ताकि तस्करी के इस गढ़ को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके. File Photo