जशपुर: हाथियों के डर से धान केंद्रों पर हड़कंप, मिलरों की सुस्ती से बढ़ा खतरा
जशपुर । डेस्क: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में धान खरीदी के अंतिम दौर के बीच हाथियों की धमक ने समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है. जिले के तपकरा और पत्थलगांव वन परिक्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे रखा है.
धान की महक से आकर्षित होकर हाथियों के दल लगातार इन केंद्रों के आसपास मंडरा रहे हैं, जिससे न केवल जानमाल का खतरा बढ़ गया है, बल्कि आर्थिक नुकसान की तलवार भी लटक रही है.
तपकरा वन परिक्षेत्र, जो ओडिशा और झारखंड की सीमाओं से सटा हुआ है, वर्तमान में हाथियों का मुख्य ठिकाना बना हुआ है. यहां के बागबहार, गंझियाडीह और फरसाबहार जैसे क्षेत्रों में हाथियों का मूवमेंट साल भर रहता है, लेकिन धान की उपलब्धता ने उन्हें केंद्रों के बेहद करीब ला दिया है.
प्रबंधकों का कहना है कि हाड़ कंपाने वाली ठंड में उन्हें रातभर जागकर धान की रखवाली करनी पड़ रही है. वन विभाग ने सुरक्षा के मद्देनजर अलर्ट तो जारी किया है, लेकिन धरातल पर धान का उठाव न होना सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है.
प्रशासनिक आंकड़ों की बात करें तो जिले के 46 केंद्रों पर अब तक 33 लाख 82 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है. जिला विपणन अधिकारी शंभु गुप्ता के अनुसार, मिलरों को 33 लाख 56 हजार क्विंटल धान के लिए 'डिलिवरी ऑर्डर' (DO) जारी किए जा चुके हैं, परंतु मिलरों की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण अब तक केवल 29.75 लाख क्विंटल धान ही केंद्रों से उठ पाया है.
समिति प्रबंधकों ने सरकार से गुहार लगाई है कि संवेदनशील केंद्रों को प्राथमिकता देते हुए शत-प्रतिशत धान का उठाव तुरंत कराया जाए.
उन्हें डर है कि यदि हाथियों ने धान को नुकसान पहुंचाया या वजन में 'सूखत' के कारण कमी आई, तो इसकी भरपाई का बोझ समितियों पर डाल दिया जाएगा. वर्तमान में स्थिति यह है कि एक ओर हाथियों के हमले का डर है और दूसरी ओर आर्थिक जवाबदेही का दबाव, जिसके बीच कर्मचारी काम करने को मजबूर हैं. Symbolic Photo