रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

HC : आंतरिक आदेशों से नहीं छीने जा सकते विस्थापितों के हक

C

CG Khabar

09 अप्रै. 2026, 02:44 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के एक महत्वपूर्ण मामले में व्यवस्था दी है कि किसी भी ऐसे प्रशासनिक निर्णय को लागू नहीं किया जा सकता, जिसे सार्वजनिक न किया गया हो. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि केवल विभाग के भीतर हुई बातचीत या आंतरिक सूचनाओं के आधार पर प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास लाभों को सीमित करना अवैध और मनमाना है.


यह मामला साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और महेंद्र कुमार साहू के बीच का है. महेंद्र साहू ने 1993 में जमीन खरीदी थी, जिसे बाद में एसईसीएल ने अधिग्रहित कर लिया. 

विज्ञापन


अधिकारियों ने साहू को रोजगार देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि उन्होंने 1991 की एक अघोषित 'कट-ऑफ डेट' के बाद जमीन खरीदी है. 


अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब 1991 की मूल पुनर्वास नीति में ऐसी किसी तारीख का उल्लेख नहीं था, तो 2002 में प्रशासन और एसईसीएल के बीच हुई गुप्त बैठक के निर्णय को जनता पर थोपना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है.


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासनिक निर्णय पारदर्शी होने चाहिए और उनका प्रकाशन जरूरी है ताकि प्रभावित व्यक्ति जागरूक रहे. 


हालांकि, अंत में याचिकाकर्ता द्वारा रोजगार के बजाय उचित मुआवजे की सहमति देने पर, कोर्ट ने एकल पीठ के 10 लाख रुपये के मुआवजे को संशोधित कर 5 लाख रुपये कर दिया. 


अदालत ने एसईसीएल को आदेश दिया है कि इस राशि का भुगतान 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए. यह फैसला उन हजारों भू-विस्थापितों के लिए एक नजीर साबित होगा जिनके हक अक्सर पेचीदा प्रशासनिक नियमों की आड़ में दबा दिए जाते हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP