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हाईकोर्ट का निर्देश: केवल अफसरों से नहीं, विशेषज्ञों से बचेगी छत्तीसगढ़ की नदियाँ

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17 मार्च 2026, 01:16 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदियों के अस्तित्व पर मंडराते संकट को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. प्रदेश की 19 नदियों और उनके सूखते उद्गम स्थलों के संरक्षण के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को नई और व्यापक समिति गठित करने का निर्देश दिया है. 


मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बनाई गई कमेटी केवल अधिकारियों तक सीमित है, जबकि नदियों के संरक्षण के लिए स्थानीय जुड़ाव और विशेषज्ञता का होना अनिवार्य है.

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उच्च न्यायालय ने सरकार के उस प्रस्ताव पर असंतोष जताया जिसमें केवल सात सचिव स्तर के अधिकारियों और एक सेवानिवृत्त कुलपति को शामिल किया गया था. कोर्ट ने निर्देशित किया है कि इस नई समिति में इतिहासकारों, लेखकों, पर्यावरणविदों और जन प्रतिनिधियों को भी जगह दी जाए, ताकि नदियों के ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व को समझा जा सके. 


अदालत ने एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में सुधार की तत्काल आवश्यकता है. वर्तमान में राज्य की कई महत्वपूर्ण नदियां और उनके उद्गम स्थल 'नालों' के रूप में दर्ज हैं, जिन्हें अब आधिकारिक तौर पर नदी के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.


सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि अरपा सहित छह प्रमुख नदियों के लिए कार्ययोजना तैयार है, लेकिन कोर्ट ने इस प्रक्रिया में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया. 


अब राज्य सरकार को नई कमेटी के साथ नदियों के स्रोतों की पहचान और उनके बहाव को पुनर्जीवित करने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना होगा. इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की गई है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP