हाईकोर्ट: कर्मचारियों से वसूली रद्द करने का आदेश बरकरार
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार द्वारा दायर एक रिट अपील को खारिज कर दिया. जिसमें 26 क्लास III कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के दौरान अतिरिक्त भुगतान के लिये जारी वसूली नोटिस को रद्द करने वाले एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश को बरकरार रखा गया. हाई कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि यदि मूल आदेश की तारीख से तीन महीने से अधिक की देरी होती है, तो वसूल की गई राशि को 6% वार्षिक ब्याज के साथ रिफंड किया जाये.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य पुलिस अधिकारियों द्वारा 29 जनवरी 2025 को एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई की.
मामला 26 क्लास III कर्मचारियों से संबंधित है, जिनमें दिव्या कुमार साहू, नीरन लाल और अन्य शामिल हैं, जो सभी दुर्ग के बघेरा में STF मुख्यालय में रहते हैं. उन्होंने 10 अक्टूबर 2019 को जारी एक वसूली नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें गलत वेतन निर्धारण के कारण किये गये अतिरिक्त भुगतानों की वसूली मांगी गई थी.
इससे पहले, 27 नवंबर 2019 को, एकल-न्यायाधीश पीठ ने एक अंतरिम आदेश जारी कर वसूली नोटिस पर रोक लगा दी थी. इसके बावजूद, राज्य ने कर्मचारियों से राशि की वसूली कर ली.
29 जनवरी 2025 को, एकल-न्यायाधीश पीठ ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुये राज्य को तीन महीने के भीतर वसूल की गई राशि को रिफंड करने का निर्देश दिया, और यदि समय सीमा चूक जाती है तो 6% ब्याज के साथ रिफंड करने को कहा था.
राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने तर्क दिया कि हालांकि राज्य वसूल की गई राशि को रिफंड करने के लिये तैयार है, लेकिन ब्याज का भुगतान एक बड़ा वित्तीय बोझ डालेगा.
कर्मचारियों के वकील अभिषेक पांडे ने प्रस्तुत किया कि अपीलकर्ताओं ने अंतरिम रोक आदेश के बावजूद राशि वसूल की थी. उन्होंने तर्क दिया कि कर्मचारियों को एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश के अनुसार 6% ब्याज के साथ वसूल की गई राशि का हकदार है.
तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद, हाई कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता क्लास III कर्मचारी थे और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय, पंजाब राज्य और अन्य बनाम रफीक मसीह (व्हाइट वॉशर) और अन्य, के अनुसार ऐसे कर्मचारियों से वसूली की अनुमति नहीं है.
खंडपीठ ने एकल-न्यायाधीश के आदेश में कोई अवैधता या त्रुटि नहीं पाई. इसने उल्लेख किया कि राज्य ने अंतरिम रोक के बावजूद राशि वसूल की थी और निर्धारित तीन महीने की अवधि के भीतर इसे रिफंड नहीं किया था. इसलिये रिट अपील को खारिज कर दिया गया, बिना किसी लागत के आदेश के.