छत्तीसगढ़: 2316 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति के लिए 316 दिनों से आमरण अनशन पर डीएड अभ्यर्थी
छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में 2316 सहायक शिक्षक पदों पर बहाली की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थी 316 दिनों से आमरण अनशन पर डटे हैं. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश व काउंसलिंग पूरी होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया अटकी पड़ी है, जिससे अभ्यर्थियों को सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर 2316 सहायक शिक्षक पदों पर बहाली की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है. आंदोलन के 10 महीने और 316 दिन पूरे होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है. सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के साथ-साथ काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा अभ्यर्थियों को पदस्थ नहीं किया गया है.
यह पूरा विवाद वर्ष 2023 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें शुरुआत में 2611 पदों पर बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई थी. बाद में विरोध के चलते उन्हें पदमुक्त कर दिया गया और इन स्थानों पर डीएड अभ्यर्थियों की भर्ती का फैसला हुआ.
चयन सूची जारी होने के उपरांत लगभग 1300 पदों पर पदस्थापना दी गई, जबकि 1316 पद शेष रह गए. इसके अतिरिक्त, नए सेटअप के तहत स्वीकृत 6000 शिक्षक पदों में से 5000 पर भर्ती हुई और 984 पद रिक्त रह गए. इन दोनों को मिलाकर कुल 2316 रिक्त पदों पर पात्र डीएड उम्मीदवारों की वैध नियुक्ति की मांग की जा रही है.
अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को अपने खून से पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है. लगातार जारी अनशन के दौरान 300 से अधिक प्रदर्शनकारियों का स्वास्थ्य बिगड़ चुका है.
आंदोलन का प्रभाव त्योहारों के दौरान भी देखने को मिला, जब रक्षाबंधन के अवसर पर महिला अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्रियों को राखी बांधकर अपने भविष्य की रक्षा और 2300 पदों पर नियुक्ति की अपील की.
रायपुर में प्रदर्शन और आत्मदाह के प्रयास के दौरान पुलिस कार्रवाई के तहत अभ्यर्थियों को रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया. इस घटनाक्रम और जेल में बिताए समय के कारण अभ्यर्थियों को गंभीर सामाजिक तानों, कटाक्ष और सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी का सामना करना पड़ रहा है.
पीड़ित उम्मीदवार मूरली चंद्रवंशी और फूल सीता के अनुसार, प्रशासनिक देरी और सामाजिक परेशानियों के कारण उनकी शादी-विवाह के रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि यह प्रदर्शन अब केवल रोजगार की मांग तक सीमित न रहकर न्याय, अधिकार और संवैधानिक सम्मान की लड़ाई का रूप ले चुका है.