नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई तेज और बस्तर का विकास होगा- सीएम साय
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को न्यू सर्किट हाउस में एक उच्च-स्तरीय एकीकृत कमान बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को तेज करने और प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने पर जोर दिया गया. दो घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, भारतीय वायुसेना और छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
मुख्यमंत्री साय ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र सुरक्षा रणनीति और विकास के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतना रहा. उन्होंने कहा, “आज की बैठक बहुत सार्थक रही. हम मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, और यह संकल्प निश्चित रूप से पूरा होगा. हमारे सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ लड़ रहे हैं.”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं और आजीविका के अवसर सुनिश्चित करने पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बस्तर के लोग “शासन के बदलाव को अपने दैनिक जीवन में महसूस करें.”
पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के परिणामस्वरूप 454 माओवादी ढेर किए गए, 1,600 से अधिक गिरफ्तार हुए और लगभग 1,700 ने आत्मसमर्पण किया. इस अवधि में 65 नए सुरक्षा शिविर भी स्थापित किए गए हैं.
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि बैठक में अंतरराज्यीय समन्वय, नई तकनीक का उपयोग, आत्मसमर्पण प्रक्रिया और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रेलवे लाइनों, सड़कों और नए स्कूलों के विस्तार जैसे विकास कार्यों पर चर्चा हुई.
उन्होंने स्पष्ट किया, “हमने कहा है कि अगले साल मार्च तक सशस्त्र माओवाद को खत्म कर देंगे. नक्सलवाद के विभिन्न इकाइयों में से इसके सशस्त्र कैडर को मार्च तक समाप्त कर दिया जाएगा. इसके बाद, विकास और कट्टरपंथी लोगों को मुख्यधारा में लाने की प्रक्रिया जारी रहेगी. हम सुरक्षा में कोई कमी नहीं रहने देंगे.”
शर्मा ने यह भी चेतावनी दी कि जो नक्सली नागरिकों की हत्या कर अपनी मौजूदगी दिखा रहे हैं, उनके लिए पुनर्वास का रास्ता बंद होगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बस्तर की अप्रयुक्त संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र उद्योगों और पर्यटन के लिए एक आकर्षक गंतव्य हो सकता है.
उन्होंने कहा, “बस्तर में विश्व के सबसे सुंदर जंगल हैं और यह उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है. हम मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नौकरियों, शिक्षा और युवाओं के लिए कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित कर आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम बस्तर में एक निवेशक सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर आगे बढ़ रहे हैं.”
अधिकारियों ने बताया कि बैठक में ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश की सीमाओं पर संचालन को और सख्त करने के लिए अंतर्राज्यीय समन्वय पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा, नक्सल पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति की समीक्षा की गई, जिसका उद्देश्य कैडर को रोजगार और पुनर्वास सहायता के साथ मुख्यधारा में वापस लाना है.