CIMS बिलासपुर में एमआर पर रोक से उठे सवाल
CIMS बिलासपुर में MRs पर Ban कितना सही?
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के सिम्स मेडिकल कालेज के अस्पताल में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का प्रवेश बंद कर दिया गया है. संयुक्त संचालक अधीक्षक, सिम्स चिकित्सालय बिलासपुर द्वारा इस संबंध में हाल ही में एक सर्कुलर भी जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि इससे मरीजों को परेशानी होती है.
इस निर्देश को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं.
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का कहना है कि यदि देश के तीन कानूनों ड्रग एण्ड कॉस्मेटिक एक्ट 1940, मैजिक रेमेडीज एण्ड आब्जेक्शेनल एक्ट 1954 तथा सेल्स प्रमोशन ईम्प्लाईज एक्ट को जोड़कर देखे तो केवल मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स ही डॉक्टरों के पास, साहित्य के माध्यम से दवाओं का प्रचार कर सकते हैं. दूसरी बात यह है कि यदि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का प्रवेश ओपीडी समय में प्रतिबंधित कर दिया जाता है तो वे डॉक्टरों से कब मिल सकते हैं.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में रमन सरकार के समय मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स के कार्य अवधि को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने एक सर्कुलर जारी किया था. जिसके अनुसार मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स के कार्य करने का समय बिलासपुर में प्रातः 10 बजे से लेकर सायंकाल 6 बजे तक का है. जाहिर है, ऐसे में ताज़ा सर्कुलर को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि संयुक्त संचालक अधीक्षक, सिम्स चिकित्सालय, बिलासपुर क्या मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स के लिये कोई नया कार्य का समय तय करना चाहते हैं?
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि इस प्रतिबंध के बाद, अस्पताल के डॉक्टरों को नईआविष्कृत दवाओं के बारे में, उनके डोज के बारे में, उनके मूल्य के बारे में तथा उनकी उपलब्धता के बारे में कौन जानकारी देगा. बेशक, सरकारी अस्पताल में मुफ्त की दवाई उपलब्ध रहती है तथा दी जाती है लेकिन वहां भी सभी दवायें उपलब्ध नहीं रहती हैं.
इस तरह से यदि केवल अस्पताल के दवाईयों के भरोसे ईलाज़ करने का आदेश दिया जाता है तो वह मरीज़ के साथ अन्याय होगा. सभी मरीज मुफ्त की दवाई लेना नहीं चाहते हैं. कई ऐसे भी होते हैं जो सरकारी डॉक्टरों को दिखाकर खुले बाज़ार से दवाई लेना चाहते हैं.
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स का कहना है कि इस तरह से उनके प्रवेश को प्रतिबंधित करना न केवल संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह मरीजों के साथ भी अन्याय है.