आवास योजना और क्रिकेट को लेकर सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने शुक्रवार को हुई बैठक में कई बड़े और आम आदमी से जुड़े फैसले लिए हैं. इनमें आवास योजनाओं के नियमों को आसान बनाने, नवा रायपुर क्रिकेट स्टेडियम को लीज पर देने और किसानों से दलहन-तिलहन फसलों की खरीदी जारी रखने के निर्णय शामिल हैं.
सरकार ने दीनदयाल आवास योजना, अटल आवास योजना, अटल विहार योजना और नवा रायपुर मुख्यमंत्री आवास योजना में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं.
बिना अनुदान के कोई भी खरीद सकता है: अगर EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और LIG (निम्न आय वर्ग) के फ्लैट्स और मकानों के लिए तीन बार विज्ञापन देने के बाद भी वे नहीं बिक पाते हैं, तो उन्हें अब कोई भी व्यक्ति, भले ही वह निर्धारित आय वर्ग का न हो, खरीद सकता है. हालांकि, ऐसे खरीदारों को सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी (अनुदान) नहीं मिलेगी. सब्सिडी सिर्फ उसी को मिलेगी जो आय की पात्रता पूरी करता हो.
संस्थाएं भी खरीद सकेंगी एक से ज्यादा मकान: तीन बार विज्ञापन के बाद भी नहीं बिकने वाले मकानों को अब कोई भी अकेला व्यक्ति या सरकारी/निजी संस्था एक साथ (Bulk Purchase) एक से ज़्यादा संख्या में खरीद सकती है. इससे खाली पड़े मकानों को बेचने में मदद मिलेगी. इन 'बल्क खरीद' करने वालों को भी सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा.
नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को अब छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ को दीर्घकालीन लीज पर देने का महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है. इस निर्णय से राज्य के युवा क्रिकेट खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. इससे छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ज़्यादा क्रिकेट मैच होने का रास्ता साफ हो गया है.
किसानों के हित में, मंत्रिपरिषद ने खरीफ और रबी सीजन में दलहन और तिलहन फसलों की खरीदी को पिछले साल की तरह जारी रखने का फैसला किया है. यह खरीदी 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' (PM-AASHA) के तहत समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी. इस योजना के तहत अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन, चना, सरसों और मसूर जैसी फसलें खरीदी जाती हैं. इससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बनी रहेगी.
इसके अलावा, सरकार ने अपने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करते हुए सार्वजनिक उपक्रम विभाग को वाणिज्य और उद्योग विभाग में मिला दिया है, और बीस सूत्रीय कार्यान्वयन विभाग को योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में शामिल कर दिया गया है.