छत्तीसगढ़: जनभागीदारी से 'बर्ड काउंट अभियान' को मिल रही नई गति
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में पक्षी संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शुरू हुआ 'बर्ड काउंट अभियान' तेजी से लोक-अभियान का रूप ले रहा है. राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को जोड़कर राज्य की पक्षी विविधता का एक सटीक और वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार करना है. इसमें विशेषज्ञ, छात्र, युवा वर्ग, स्वयंसेवक और स्थानीय ग्रामीण बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं.
हरेली बर्ड फेस्टिवल से मिली मजबूत शुरुआत
अभियान को सार्वजनिक स्तर पर पहली बड़ी सफलता 'हरेली बर्ड फेस्टिवल-2026' के माध्यम से मिली, जिसका आयोजन राज्य के सभी 33 जिलों में किया गया था. तीन दिवसीय इस महोत्सव के दौरान प्रतिभागियों ने 954 ई-बर्ड चेकलिस के जरिए पक्षियों की 211 प्रजातियों की पहचान कर रिकॉर्ड दर्ज किया था. इसी शुरुआती गति को आगे बढ़ाते हुए अब जिला स्तर पर नियमित बर्डवॉचिंग गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.
केवल गिनती नहीं, नागरिक विज्ञान का बड़ा प्रयास
यह पहल सिर्फ पक्षियों की संख्या गिनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'नागरिक विज्ञान' (सिटिजन साइंस) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके तहत आम लोग अपने आसपास के तालाबों, आर्द्रभूमियों, नदियों के किनारों, खेतों, जंगलों और शहरी इलाकों में जाकर पक्षियों को निहार रहे हैं. प्रतिभागी न केवल पक्षियों की तस्वीरें खींच रहे हैं, बल्कि उनकी प्रजातियों की पहचान कर वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म्स पर डेटा भी दर्ज कर रहे हैं. इससे लोगों में अपने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर समझ विकसित हो रही है.
स्वतंत्र अवलोकन और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नागरिकों को संगठित कार्यक्रमों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता; वे अपनी सुविधानुसार स्वतंत्र रूप से भी बर्ड काउंट कर सकते हैं. डेटा की शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अनुभवी पक्षी विशेषज्ञ और बर्डर्स नए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं. वे लोगों को पक्षियों के व्यवहार, उनके आवास और सही वैज्ञानिक तरीकों से अवलोकन करने की जानकारी दे रहे हैं, जिससे पहली बार जुड़ रहे युवाओं का उत्साह बढ़ा है.
ई-बर्ड प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो रहा वैश्विक रिकॉर्ड
अभियान के दौरान एकत्र किए गए सभी आंकड़ों को वैश्विक वैज्ञानिक डेटाबेस 'ई-बर्ड' (eBird) पर अपलोड किया जा रहा है. राज्यभर से आने वाले इस डेटा से छत्तीसगढ़ की पक्षी विविधता, उनके मुख्य आवास स्थलों और प्रजातियों के फैलाव का एक पारदर्शी खाका तैयार होगा. भविष्य में राज्य में जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की योजनाएं बनाने में यह डेटा एक मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा.
सामुदायिक सहभागिता से मजबूत होता संरक्षण नेटवर्क
इस अभियान में स्व-सहायता समूहों, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों और युवा स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी से संरक्षण का दायरा लगातार फैल रहा है. वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की योजना इस पहल को आगे भी निरंतर जारी रखने की है. इसके तहत स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, नियमित बर्ड वॉक और महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की सतत निगरानी जैसे कदम उठाए जाएंगे, ताकि जनभागीदारी के जरिए पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक मजबूती दी जा सके.