छत्तीसगढ़ बना शिशु स्तनपान में देश का नंबर-1 राज्य
रायपुर । संवाददाता: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ शिशु स्वास्थ्य और पोषण के मामले में देश का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है. देश में जहां एक ओर स्तनपान की दरों में चिंताजनक गिरावट देखी जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ ने 'एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग' (शिशु के जन्म के शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध देने) के मामले में पूरे भारत में शीर्ष स्थान हासिल किया है.
सर्वेक्षण के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में छह महीने से कम उम्र के 75.8 प्रतिशत बच्चों को विशेष रूप से स्तनपान कराया जा रहा है, जो देश में सबसे अधिक है. इस सूची में केरल 72.7 प्रतिशत के साथ दूसरे और गुजरात 71.4 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है.
इसके विपरीत, राष्ट्रीय औसत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले सर्वेक्षण (NFHS-5) में जहां देश का औसत 63.7 प्रतिशत था, वह अब घटकर 55.8 प्रतिशत पर आ गया है. इस गिरावट के बीच उत्तर प्रदेश (34.6 प्रतिशत) और हरियाणा (41.2 प्रतिशत) जैसे राज्यों का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है, जहां स्तनपान की दरों में भारी कमी आई है.
छत्तीसगढ़ ने न केवल छह महीने तक स्तनपान कराने में बल्कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद यानी पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान (अर्ली इनीशिएशन) शुरू कराने में भी शानदार प्रगति की है.
राज्य में यह आंकड़ा पिछले सर्वे के 32 प्रतिशत से बढ़कर अब लगभग 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है. बिहार और झारखंड में भी इस मोर्चे पर सुधार देखा गया है, जबकि केरल 82 प्रतिशत के साथ इस सूची में सबसे आगे है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराना बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और उनके बेहतर विकास के लिए सबसे कारगर माध्यम है. राष्ट्रीय स्तर पर आ रही गिरावट के बीच छत्तीसगढ़ का यह मॉडल देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया है.