झंडा फहराने 13 बच्चों के लिए 2 घंटे चलकर गए 2 शिक्षक
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे छोटे से बछवार गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में इस स्वतंत्रता दिवस तिरंगा गर्व से लहराया. इस स्कूल में सिर्फ 13 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन उनके लिए यह दिन किसी बड़े उत्सव से कम नहीं रहा.
इस छोटे से आयोजन के पीछे खड़ा था दो शिक्षकों का अदम्य जज्बा—पंकज एक्का और श्याम साय. दोनों शिक्षक करीब दो घंटे तक घने जंगल, उबड़-खाबड़ पगडंडियां और चन्नन नदी पार करते हुए स्कूल पहुंचे. साथ में वे मिठाइयां, झंडा और उत्सव के लिए जरूरी सामान भी लेकर आए, क्योंकि गांव में कोई दुकान तक नहीं है.
“हम चाहते हैं कि यहां पढ़ने वाले बच्चे भी वही गर्व और खुशी महसूस करें, जो शहरों के बच्चे राष्ट्रीय पर्व पर करते हैं,” पंकज एक्का कहते हैं. वे 2010 से इस स्कूल में तैनात हैं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यहां डटे हुए हैं. कई शिक्षक तबादला करा चुके हैं, लेकिन एक्का और साय अब भी रोज दो घंटे पैदल चलकर बच्चों तक ज्ञान और उम्मीद पहुंचा रहे हैं.
बछवार गांव खड़िया डमर पंचायत के अंतर्गत आता है. यहां पक्की सड़कें नहीं हैं और बाहरी लोगों को स्कूल तक पहुंचने में तीन घंटे लगते हैं. फिर भी, शिक्षक शायद ही कभी छुट्टी करते हैं. बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ वे उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए नजदीकी आवासीय स्कूलों में दाखिला लेने को भी प्रेरित करते हैं.
2005 में स्थापित इस स्कूल में कई शिक्षक मुश्किलें देखकर चले गए, लेकिन एक्का और साय का समर्पण अब भी अटूट है. “हर सुबह हम यह सोचकर निकलते हैं कि हम सिर्फ पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ा रहे, बल्कि बच्चों को सपने देखने और आगे बढ़ने का साहस भी दे रहे हैं,” एक्का मुस्कुराते हुए कहते हैं.
जिला शिक्षा अधिकारी डी.एन. मिश्रा ने भी इन दोनों शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा, “यह बहुत ही प्रेरणादायी उदाहरण है. मैंने जिले के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे चाहे क्षेत्र कितना भी दूरस्थ क्यों न हो, राष्ट्रीय पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाएं.”
इस स्वतंत्रता दिवस पर जब बछवार की पहाड़ी पर तिरंगा लहराया, तो नन्हे बच्चों की आंखों में भी सपनों का आसमान थोड़ा और पास महसूस हुआ.