छत्तीसगढ़ विधानसभा में 14,655 करोड़ रुपये की अनुदान मांगें पारित
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 14,655.74 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगों को अपनी मंजूरी दे दी है. यह बजट आवंटन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 1.72 लाख करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी 'संकल्प बजट' को जमीनी स्तर पर उतारने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास माना जा रहा है. विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी स्थापना की रजत जयंती मना रहा है, और सरकार ने इस अवसर को राज्य के विकास के लिए एक 'लॉन्च पैड' के रूप में इस्तेमाल करने का स्पष्ट संकेत दिया है.
इस बजट में बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से सड़कों और पुलों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, जबकि स्वास्थ्य, पेयजल और युवा कौशल विकास पर भी भारी-भरकम निवेश का प्रावधान किया गया है.
बजट के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ है कि बुनियादी ढांचा विकास सरकार की पहली प्राथमिकता है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए कुल 9,451 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो इस अनुदान राशि का सबसे बड़ा हिस्सा है. इस राशि का उपयोग राज्य भर में सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण के साथ-साथ उनके रखरखाव के लिए किया जाएगा. रायपुर जैसे प्रमुख शहरों और संभागीय मुख्यालयों में यातायात के दबाव को कम करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए फ्लाईओवर निर्माण को प्राथमिकता दी गई है.
सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए अलग से 51 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. छत्तीसगढ़ के भौगोलिक परिवेश को देखते हुए यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक सड़क संपर्क पर निर्भर है.
विशेष रूप से बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि जीवन रेखा हैं जो सुदूर गांवों को बाजारों, अस्पतालों और स्कूलों से जोड़ती हैं.
बस्तर क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे के लिए 'नियद नेल्लानार योजना' के तहत 1,109 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन किया गया है, जो इस संवेदनशील क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक बदलाव में बड़ी भूमिका निभाएगा.
विकास के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ 'पेयजल' पर ध्यान केंद्रित करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के लिए 3,000 करोड़ रुपये सुरक्षित किए गए हैं. सरकार का लक्ष्य इस राशि से लगभग नौ लाख परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराना और लंबित जल योजनाओं को पूरा करना है. इसके अलावा, कम भूजल स्तर वाले ग्रामीण इलाकों में नाबार्ड के सहयोग से 44 समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए 260 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
बजट में धमतरी की सिर्री योजना जैसे विशिष्ट स्थानीय प्रोजेक्ट्स के लिए भी राशि आवंटित की गई है, जो दर्शाता है कि सरकार केवल बड़े आंकड़ों पर नहीं, बल्कि कार्यान्वयन की बारीकियों पर भी ध्यान दे रही है. शहरी क्षेत्रों में जल परियोजनाओं और जलाशयों पर आधारित जलापूर्ति के लिए भी अलग से प्रावधान किए गए हैं, ताकि आने वाले वर्षों में पानी की किल्लत को पूरी तरह समाप्त किया जा सके.
स्वास्थ्य और युवा सशक्तिकरण को लेकर भी सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. 'शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना' के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह राज्य स्तरीय योजना केंद्र की आयुष्मान भारत योजना की पूरक होगी और विशेष रूप से आदिवासी समुदायों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करेगी.
शिक्षा और कौशल के क्षेत्र में सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मिशन, निपुण मिशन और खेल उत्कृष्टता मिशन की शुरुआत की है. ये पहल राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर, आईटी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से की गई हैं.
शहरी विकास के लिए भी दो नई योजनाएं पेश की गई हैं, जिनमें भूमिगत विद्युतीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये और 'आदर्श शहर समृद्धि योजना' के लिए 200 करोड़ रुपये शामिल हैं, जिनका लक्ष्य प्रदेश के टियर-2 शहरों का आधुनिकीकरण करना है.
सदन में चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के बजट एक क्रमिक विकास का हिस्सा हैं पहले वर्ष में ज्ञान, दूसरे में गति और तीसरे में 'संकल्प'. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को पूरा करने वाला बजट बताया.
हालांकि, इस विधायी प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक गहमागहमी भी देखने को मिली. विपक्ष (कांग्रेस) के बहिष्कारों के बीच चर्चा को आगे बढ़ाते हुए अरुण साव ने कहा कि विपक्ष की अनुपस्थिति राज्य के विकास के प्रति उनकी अरुचि को दर्शाती है.
दिलचस्प बात यह रही कि सत्ता पक्ष के ही वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कुछ क्षेत्रों में कमियों की ओर ध्यान दिलाते हुए अपनी सरकार से सुधार की मांग की. उन्होंने 'मेड इन छत्तीसगढ़' पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि जब तक कौशल विकास और औद्योगिक नीतियां स्थानीय युवाओं के लिए वास्तविक रोजगार में तब्दील नहीं होंगी, तब तक 'विजन 2047' केवल एक सपना बनकर रह जाएगा.
अंततः, छत्तीसगढ़ सरकार ने रजत जयंती वर्ष में 8.11% की वास्तविक जीएसडीपी वृद्धि का लक्ष्य रखा है, जिसके 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. बजट में 'ज्ञान' (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) और 'गति' (शासन, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी, उद्योग) के स्तंभों पर जो जोर दिया गया है, वह राज्य को एक विकसित इकाई बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम है.
लेकिन, जैसा कि विशेषज्ञों का मानना है, इन भारी-भरकम आवंटनों की असली परीक्षा उनके जमीन पर क्रियान्वयन से होगी. क्या सड़कें समय पर बनेंगी? क्या नौ लाख परिवारों को वास्तव में चालू नल कनेक्शन मिलेंगे? और क्या एआई मिशन राज्य के युवाओं को रोजगार दिला पाएगा?
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि छत्तीसगढ़ की रजत जयंती का यह जश्न प्रदेश के आम नागरिक के जीवन में कितनी खुशहाली लाता है. फिलहाल, 14,655 करोड़ रुपये की इन मंजूरियों ने राज्य की विकास यात्रा के अगले अध्याय की मजबूत नींव रख दी है.