गृहमंत्री अमित शाह शनिवार बस्तर जायेंगे, कांग्रेस ने कहा डैमेज कंट्रोल
जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में कड़ी सुरक्षा के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार (4 अक्टूबर) को पहुंचने वाले हैं. यह दौरा सरकार की 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने की समयसीमा से करीब छह महीने पहले हो रहा है, जो राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
गृहमंत्री के दौरे से ठीक पहले बीजापुर जिले में विजयादशमी के मौके पर 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस के अनुसार, इन आत्मसमर्पित नक्सलियों पर कुल एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था. हालांकि, इस बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण के पीछे शाह के दौरे का समय संदिग्ध लग रहा है.
अधिकारियों ने बस्तर क्षेत्र के सभी सुरक्षा कैंपों और थानों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा बिछाया गया है, साथ ही सीमावर्ती इलाकों में निगरानी तेज कर दी गई है. ब्लॉकेड लगाए गए हैं और गहन जांच अभियान चलाया जा रहा
है. गृहमंत्री पहले ही रायपुर पहुंच चुके हैं, जहां उनका स्वागत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एयरपोर्ट पर किया.
आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, शाह दोपहर 12 बजे जगदलपुर पहुंचेंगे और सबसे पहले दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. इसके बाद वे विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव के प्रमुख अनुष्ठान 'मुरिया दरबार' में शरीक होंगे. यहां वे 'मांझी', 'चालकी', 'कोटवार' और 'पटेल' समुदायों की चिंताओं को सुनेंगे. साथ ही, आदिवासी नेताओं और समुदाय के सदस्यों के साथ दोपहर का भोजन भी करेंगे.
कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रमुख दीपक बैज ने शाह के दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दौरा महज नुकसान की भरपाई के लिए है. उन्होंने आरोप लगाया, "शाह के दौरे से ठीक पहले इतने बड़े संख्या में आत्मसमर्पण संदिग्ध है. एक तरफ नक्सली ग्रामीणों की हत्या कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस मुठभेड़ हो रही हैं और सैकड़ों नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं. ये विरोधाभासी घटनाएं सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं."
बैज ने आगे कहा, "समर्पित नक्सलियों की पूरी प्रोफाइल सार्वजनिक की जानी चाहिए."
उन्होंने सत्ताधारी भाजपा पर आंतरिक कलह और प्रशासनिक विफलता का भी आरोप लगाया. "मंत्रिमंडल विस्तार के बाद वरिष्ठ विधायक नाराज हैं और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण पूरी तरह विफल रहा है. अमित शाह का यह दौरा डैमेज कंट्रोल के लिए है, बस्तर यात्रा तो बहाना मात्र है."