अंबिकापुर का गार्बेज कैफे: प्लास्टिक कचरे के बदले भोजन
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में भारत का पहला गार्बेज कैफे 2019 से प्लास्टिक प्रदूषण और भूखमरी से लड़ने का अनूठा समाधान पेश कर रहा है. यहाँ लोग एक किलो प्लास्टिक कचरे के बदले दोपहर का भोजन और आधा किलो के बदले नाश्ता जैसे समोसा या वड़ा पाव प्राप्त कर सकते हैं.
अंबिकापुर नगर निगम के स्वच्छता बजट से संचालित यह कैफे रोज़ाना लगभग 20 लोगों को भोजन देता है और कचरे को कम करने में मदद करता है.
2019 में 5 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा लैंडफिल में जाता था, जो 2024 में घटकर 2 टन रह गया. इस पहल ने अंबिकापुर को भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक बनाने में योगदान दिया है.
कैफे में प्लास्टिक की बोतलें, रैपर और बैग स्वीकार किए जाते हैं, जिनके बदले चावल, दाल, रोटी, सब्जी और अचार जैसे पौष्टिक भोजन दिए जाते हैं.
यह पहल बेघर लोगों जैसे कमजोर समुदायों को सम्मानजनक तरीके से सहायता प्रदान करती है.
यह कैफे स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर के व्यापक कचरा प्रबंधन का हिस्सा है.
अंबिकापुर ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, 20 कचरा संग्रह केंद्र और 500 स्वच्छता दीदियों को नियुक्त किया है. एकत्रित प्लास्टिक को सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे के लिए रिसाइकिल किया जाता है.
यह मॉडल भोपाल और दिल्ली जैसे शहरों में भी अपनाया जा रहा है, जो पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देता है.
यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक नवाचार कैसे मानवीय जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण के बीच सामंजस्य स्थापित कर सकता है.
(फोटो- प्रतीकात्मक)