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AI आधारित एलीफेंट अर्ली वार्निंग सिस्टम को वैश्विक पहचान

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04 जुल. 2026, 01:11 AM 2 मिनट में पढ़ें 3

हाथी
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रायपुर । संवाददाता: मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा किए जा रहे अभिनव प्रयासों को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है. अमेरिका की प्रतिष्ठित 'एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू' (MIT Technology Review) ने राज्य के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और थर्मल ड्रोन आधारित 'एलीफेंट अर्ली वार्निंग सिस्टम' को अपने अंक में प्रमुखता से स्थान दिया है.


यह अत्याधुनिक प्रणाली छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में सफलतापूर्वक काम कर रही है. घने जंगलों में रात के अंधेरे में हाथियों के झुंड को ट्रैक करना और उनके रिहाइशी इलाकों की ओर बढ़ने से पहले लोगों को सचेत करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है. इस संकट से निपटने के लिए विभाग ने थर्मल ड्रोन, एआई और त्वरित मोबाइल अलर्ट का एक अनूठा नेटवर्क तैयार किया है.

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कैसे काम करता है यह सिस्टम:


थर्मल मैपिंग: इंफ्रारेड कैमरों से लैस ड्रोन रात के समय हाथियों की थर्मल इमेज लेते हैं.


एआई प्रोसेसिंग: जैसे ही हाथियों की मौजूदगी का पता चलता है, विभाग का इन-हाउस एआई सिस्टम इस डेटा को तुरंत प्रोसेस कर वास्तविक समय में सटीक चेतावनी तैयार करता है.


त्वरित अलर्ट: हाथियों की लोकेशन के आधार पर 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों और वन कर्मियों को एसएमएस, वॉयस कॉल और व्हाट्सएप के जरिए तुरंत अलर्ट भेज दिया जाता है.


प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF - HoFF) अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि राज्य के उबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में इस जटिल तकनीक को रोजाना के कामकाज में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन वन विभाग ने इसे 24 घंटे काम करने वाले एक त्वरित प्रतिक्रिया नेटवर्क में बदल दिया है.


उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन, जिन्होंने इस सिस्टम को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, ने कहा कि पहले घने जंगलों में रात के समय गश्ती दलों के लिए हाथियों की निगरानी करना बेहद मुश्किल था. इस तकनीक ने उस दूरी को पाट दिया है और एक बेहद मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार किया है.


इस तकनीक और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी का ही नतीजा है कि हाथियों की नियमित आवाजाही के बावजूद, पिछले एक साल से अधिक समय से इस क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष के कारण एक भी जान नहीं गई है. ऐसे समय में जब दुनियाभर की सरकारें वन्यजीव संरक्षण और इंसानी सुरक्षा के लिए तकनीकी समाधान तलाश रही हैं, छत्तीसगढ़ के इस देसी और आधुनिक मॉडल को वैश्विक स्तर पर सराहा जाना बेहद मायने रखता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP