छत्तीसगढ़: 3 साल में 296 श्रमिकों ने गंवाई जान, 980 इकाइयां 'खतरनाक' घोषित
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों से सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं. राज्य विधानसभा में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के विभिन्न उद्योगों में हुए हादसों में कुल 296 श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि 248 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के सवाल का जवाब देते हुए उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 7,324 सरकारी और निजी कारखाने संचालित हैं.
सरकारी ऑडिट में सुरक्षा के लिहाज से इन उद्योगों का वर्गीकरण चौंकाने वाला है.
प्रशासन ने 948 औद्योगिक इकाइयों को 'खतरनाक' और 32 इकाइयों को 'अति-खतरनाक' की श्रेणी में रखा है.
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन इकाइयों का वर्गीकरण कारखाना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ औद्योगिक प्रमुख दुर्घटना नियंत्रण नियम 1999 के आधार पर रसायनों के भंडारण और निर्माण प्रक्रिया को देखकर किया गया है.
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा इन संयंत्रों को समय-समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर भंडारण, पेलेट प्लांट और लिफ्टिंग उपकरणों के सुरक्षित उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं.
नियमों के अनुसार श्रमिकों को हेलमेट, जूते, दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण (PPE) उपलब्ध कराना अनिवार्य है, साथ ही कैंटीन और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी हैं.
हालांकि, जमीनी हकीकत अलग नजर आती है. हाल ही में 22 जनवरी को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के एक स्टील प्लांट में हुए विस्फोट में 6 मजदूरों की मौत ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है. जीवित बचे श्रमिकों और कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि संयंत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कठिन कार्य परिस्थितियां इन जानलेवा हादसों का मुख्य कारण हैं.