2 दिन की नवजात बच्ची की हार्ट सर्जरी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने केवल दो दिन की एक नवजात बच्ची की जान बचाने के लिये एक जटिल और संवेदनशील हृदय प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. यह छत्तीसगढ़ की अब तक की सबसे कम उम्र और सबसे हल्की (1.9 किलोग्राम) वज़न की मरीज बन गई है, जिसकी हार्ट सर्जरी की गई है.
यह बच्ची जुड़वां बहनों में से एक है और जन्म के तुरंत बाद उसकी ऑक्सीजन लेवल अत्यधिक कम पाया गया. जांच में सामने आया कि उसे वॉल्वर पल्मोनरी एट्रेसिया नामक जन्मजात हृदय रोग है, जिसमें हृदय और फेफड़ों को जोड़ने वाला वाल्व पूरी तरह से बंद होता है.
बच्ची को पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) हुई थी, जो गर्भ में रक्त को फेफड़ों तक जाने से रोकती है और जन्म के बाद कुछ ही दिनों में बंद हो जाती है. यदि यह बंद हो जाती, तो बच्ची को ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी बंद हो जाती और उसकी मृत्यु हो सकती थी. स्थिति की गंभीरता को समझते हुए डॉक्टरों ने तत्काल निर्णय लिया कि हृदय का बंद वाल्व खोलना जरूरी है.
9 मई, 2025 को बच्ची को रायपुर के MMI नारायणा अस्पताल में स्थानांतरित किया गया. यहां कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. किंजल बख्शी और डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी के नेतृत्व में, और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. राकेश चंद की देखरेख में कैथ लैब में एक विशेष कैथेटर प्रक्रिया की गई. इस प्रक्रिया के तहत बिना ओपन सर्जरी के संकरे वाल्व को खोला गया, जिससे फेफड़ों की ओर रक्त का प्रवाह सामान्य हो गया.
सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में तेज़ सुधार हुआ और उसे वापस उसी नवजात अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां उसका जुड़वां भाई समय से पहले जन्म के कारण इलाजरत है और उसकी मां प्रसव से उबर रही हैं.
डॉ. बख्शी ने कहा, "यह हम सभी के लिए और बच्ची के परिवार के लिए अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है. हमारी जानकारी में यह छत्तीसगढ़ की सबसे कम उम्र और सबसे हल्की बच्ची है, जिस पर सफलतापूर्वक कार्डियक इंटरवेंशन किया गया है. हमें विश्वास है कि वह सामान्य और स्वस्थ जीवन जियेगी."