CEC ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी तरीके से बदला फॉर्म 6- राहुल गांधी
नई दिल्ली । डेस्क: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान 'फॉर्म 6' में हुए बदलावों को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने 'गैर-कानूनी और एकतरफा' तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया है. उन्होंने इसे "लोकतंत्र पर आपराधिक हमला" करार देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार सहित इस साजिश में शामिल हर व्यक्ति को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा.
फॉर्म 6 में अवैध बदलाव का सच आया सामने
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के दृष्टिकोण से, यह अब पूरी तरह से स्थापित हो चुका है कि चुनाव आयोग ने ऑनलाइन आवेदन में नए मतदाताओं को जोड़ने वाले फॉर्म 6 के साथ मनमाने ढंग से छेड़छाड़ की. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच X पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्याकांत ने खुद स्पष्ट किया है कि शीर्ष अदालत ने संशोधित फॉर्म 6 को कभी मंजूरी नहीं दी थी. राहुल गांधी के अनुसार, चुनाव आयोग ने अदालत के नाम पर देश और जनता को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे मुख्य निर्वाचन आयुक्त का "झूठ और असंवैधानिक आचरण" बेनकाब हो गया है.
युवा मतदाताओं को प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश
कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने संविधान और कानून की धज्जियां उड़ाई हैं. पार्टी का कहना है कि फॉर्म 6 में जानबूझकर नई शर्तें और घोषणाएं जोड़ी गईं ताकि नए एवं युवा (जेन-जी) मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकें, क्योंकि सत्ताधारी दल इन युवा मतदाताओं से घबराया हुआ है. विपक्षी दलों का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर व्यापक और भेदभावपूर्ण तरीके से योग्य वोटरों के नाम छांटे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर चुनावी निष्पक्षता पर हमला है.
अदालत का दरवाजा और जवाबदेही की मांग
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज और दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. शीर्ष अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल प्रक्रियात्मक लापरवाही का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक संगठित कोशिश है, और इसमें शामिल जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर राजनीतिक आकाओं तक सभी की जवाबदेही तय की जाएगी.