CEC ज्ञानेश कुमार खो चुके हैं पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार- कांग्रेस
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस पार्टी ने रविवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की मताधिकार पर आई कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस का दावा है कि न्यायमूर्ति भुयान की टिप्पणी यह पूरी तरह साबित करती है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने संविधान की आत्मा और अक्षर दोनों का उल्लंघन किया है, और अब उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
नालसार (NALSAR) विधि विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए न्यायमूर्ति भुयान ने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो देश के लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करती है, वह मूल रूप से मनमानी है और संवैधानिक व्यवस्था का नकार है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान दो तरह के नागरिकों की श्रेणी - एक मताधिकार वाले और दूसरे बिना मताधिकार वाले - की अनुमति नहीं देता. यदि किसी प्रक्रिया के कारण व्यापक स्तर पर नागरिक मताधिकार खो देते हैं, तो वह संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 का सीधा उल्लंघन है.
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि न्यायमूर्ति भुयान की इस बेबाक टिप्पणी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की कार्यशैली की पूरी तरह से पोल खोल दी है.
उन्होंने कहा कि एक निडर न्यायविद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदान का अधिकार संविधान के मूल ढांचे का एक अभिन्न अंग है. ऐसे में संविधान के संरक्षक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ही संविधान का उल्लंघन किए जाने के बाद ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
गौरतलब है कि कांग्रेस का यह हमला उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया है जिनमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों और आदेशों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं.
हालांकि, बढ़ते विवादों के बीच निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान में अलग-अलग विचार और मतभेद होना स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है और आयोग के सभी आदेश पूरी तरह से कानूनी और तय वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही जारी किए गए हैं.