CBSE की तीन भाषा नीति: SC की सलाह के बाद केंद्र पुनर्विचार को तैयार
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा इसी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 के छात्रों के लिए लागू की गई नई तीन-भाषा नीति पर केंद्र सरकार पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई है. सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और सुझाव के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया था कि छात्रों को अचानक आए इस बदलाव से राहत देते हुए इसे अगले साल से लागू किया जाए.
मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि सीबीएसई समिति ने पहले अदालत द्वारा कक्षा 6 के छात्रों को छूट देने के सुझाव पर विचार किया था, लेकिन वह इस पर सहमत नहीं हुई थी.
सरकार का तर्क था कि कक्षा 6 के छात्रों के पास बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए चार साल का समय है, इसलिए उनके पास तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं.
हालांकि, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सरकार के इस रुख पर असंतोष जताया. जस्टिस बागची ने कहा कि अचानक नीति लागू करने से स्कूली बच्चे हैरान-परेशान हैं. अदालत ने कहा कि कानून के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि छात्रों की सहूलियत के नजरिए से इस निर्णय पर फिर से विचार किया जाना चाहिए.
पीठ ने सुझाव दिया कि यदि सरकार चाहे तो इस वर्ष के लिए इसे ऐच्छिक (ऑप्शनल) रख सकती है और जनवरी 2027 से नए सत्र में आने वाले कक्षा 6 के छात्रों के लिए इसे पूरी तरह अनिवार्य किया जा सकता है.
अदालत की इस सलाह पर केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह इस फैसले पर निश्चित रूप से पुनर्विचार करेगी. इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी, जहां केंद्र सरकार अपना अंतिम रुख साफ कर सकती है. नई नीति के तहत कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है.