मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिये घूस, 7 गिरफ्तार
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में CBI की बड़ी कार्रवाई करते हुये मेडिकल कॉलेज मान्यता के लिये रिश्वत मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है. नवा रायपुर के श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) को मान्यता दिलाने के लिये 55 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है.
इनमें तीन महिला डॉक्टरों सहित चार डॉक्टर, दो महिला आरक्षक और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं. CBI ने मंगलवार को रायपुर के एक होटल में छापेमारी कर इन आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा.
CBI को मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में 40 से अधिक ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया. इस दौरान रायपुर में श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के निरीक्षण प्रक्रिया में रिश्वत के लेन-देन का खुलासा हुआ.
आरोप है कि मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए वैधानिक निरीक्षण में अनुकूल रिपोर्ट देने के बदले रिश्वत ली गई. रिश्वत की रकम हवाला के जरिये लेन-देन की गई, जिसमें 55 लाख रुपये बेंगलुरु में बरामद किये गये हैं.
गिरफ्तार आरोपियों में डॉ. मंजप्पा सीएन (प्रोफेसर और HOD, ऑर्थोपेडिक्स, मंड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, कर्नाटक), डॉ. चैत्रा एमएस, डॉ. अशोक शेलके, सतीशा ए, रविचंद्र के, अतुल कुमार तिवारी (श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के पदाधिकारी) और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं.
CBI ने सभी आरोपियों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया, जहां पांच दिन की रिमांड की मांग की गई. कोर्ट ने अभी इस पर फैसला नहीं सुनाया है.
जांच में सामने आया कि निरीक्षण दल के सदस्यों ने श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च के अतुल कुमार तिवारी के साथ मिलकर रिश्वत लेने की साजिश रची. डॉ. मंजप्पा सीएन ने अपने सहयोगी सतीशा को हवाला ऑपरेटर से 55 लाख रुपये एकत्र करने का निर्देश दिया था. इस रकम में से 16.62 लाख रुपये डॉ. चैत्रा के पति रविंद्रन से और 38.38 लाख रुपये सतीशा से बरामद किये गये. CBI ने इस नेटवर्क के तार देश के कई राज्यों से जुड़े होने का खुलासा किया है.
CBI ने छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये हैं. प्रारंभिक जांच से पता चला कि आरोपी निरीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिये विभिन्न रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे थे.
आरोपियों के वकील ने दावा किया कि CBI ने डॉक्टरों पर गलत आरोप लगाये हैं. उनके मुताबिक, डॉक्टर अपनी ईमानदारी से निरीक्षण के लिये आये थे और कोई रिश्वत नहीं ली गई. उन्होंने कहा कि CBI का हवाला के जरिये रिश्वत लेने का दावा आधारहीन है.
CBI ने इस मामले को चिकित्सा शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने का अहम कदम बताया है. जांच एजेंसी का कहना है कि तलाशी, पूछताछ और दस्तावेजों की जांच अभी जारी है. इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है.