कनाडाई PM की ट्रंप को दोटूक: भारत समेत मध्यम शक्तियाँ हों एकजुट
दावोस । डेस्क: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक अत्यंत प्रभावशाली और कड़ा भाषण देते हुए वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर दुनिया को आगाह किया है. कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी नेतृत्व वाली वह व्यवस्था, जिसने दशकों से वैश्विक व्यापार और राजनीति को संभाला हुआ था, अब केवल बदल नहीं रही है, बल्कि पूरी तरह टूट रही है.
उन्होंने वर्तमान स्थिति को 'बदलाव' के बजाय एक 'विच्छेद' करार दिया.
कार्नी का यह भाषण सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, विशेषकर उनके द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ और 'ग्रीनलैंड' को लेकर डेनमार्क के साथ जारी तनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है. हालांकि उन्होंने ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था कि शक्तिशाली देश अब आर्थिक एकीकरण को मजबूरी और दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
कार्नी ने चेतावनी दी कि अब वह दौर आ गया है जहां "शक्तिशाली अपनी मनमानी करते हैं और कमजोरों को सहना पड़ता है."
इस संकट से निपटने के लिए कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत जैसी 'मध्यम शक्तियों' को एक साथ आने का आह्वान किया. उन्होंने "वैरिएबल ज्योमेट्री" का सिद्धांत पेश किया, जिसका अर्थ है कि समान मूल्यों और हितों वाले देशों को रक्षा, व्यापार, तकनीक और जलवायु जैसे विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग गठबंधन बनाने चाहिए.
कार्नी ने जोर देकर कहा कि यदि मध्यम देश एकजुट नहीं हुए, तो उन्हें बड़े देशों के हितों की बलि चढ़ना पड़ेगा.
भाषण के दौरान कार्नी ने भारत के साथ बढ़ते संबंधों पर विशेष जोर दिया. उन्होंने पुष्टि की कि कनाडा अमेरिका पर अपनी अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है.
इसके साथ ही कनाडा आसियान देशों, थाईलैंड, फिलीपींस और मर्कोसुर के साथ भी व्यापारिक रणनीतियां बना रहा है. सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड का पुरजोर समर्थन किया और नाटो के प्रति कनाडा की प्रतिबद्धता को अटूट बताया. उल्लेखनीय है कि यह भाषण कार्नी ने स्वयं लिखा था, जो कि आमतौर पर बड़े नेताओं के मामले में दुर्लभ होता है.