क्या मेसी का अर्जेंटीना रच पाएगा इतिहास?
ब्यूनस आयर्स । डेस्क: फुटबॉल जगत के सबसे बड़े महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 का बिगुल बज चुका है और पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर गत चैंपियन अर्जेंटीना और उनके करिश्माई कप्तान लियोनेल मेसी पर टिकी हैं. कतर 2022 में फ्रांस को हराकर विश्व विजेता बनने के बाद, कई विश्लेषकों का मानना था कि यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का स्वर्णिम अंत था और वे संन्यास ले लेंगे.
लेकिन फुटबॉल का यह जादूगर अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हो रहे इस टूर्नामेंट में एक बार फिर अपनी टीम की कमान संभालने के लिए तैयार है. अर्जेंटीना के सामने इस बार 1962 में ब्राजील द्वारा बनाए गए लगातार दो बार विश्व कप जीतने के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को दोहराने की बड़ी चुनौती है.
उम्र और बदलाव के दौर से गुजरती चैंपियन टीम
इस बार अर्जेंटीना के लिए खिताब की रक्षा करना कतर के मुकाबले कहीं अधिक कठिन नजर आ रहा है. इंटर मियामी के लिए खेलने वाले लियोनेल मेसी इस टूर्नामेंट के दौरान 39 वर्ष के होने जा रहे हैं. हालांकि वे अब भी अमेरिकी लीग में शानदार गोल दाग रहे हैं, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर उनकी गति और ताकत में थोड़ी कमी आई है.
हैमस्ट्रिंग की मामूली चोट से उबर रहे मेसी का इस लंबे टूर्नामेंट में प्रदर्शन उनकी शारीरिक क्षमता से ज्यादा उनके अनुभव और मैदान पर जादुई उपस्थिति पर निर्भर करेगा. कतर की चैंपियन टीम के 17 खिलाड़ी इस बार भी टीम का हिस्सा हैं, जो टीम को गहरा अनुभव देते हैं, लेकिन साथ ही खिलाड़ियों की बढ़ती उम्र एक बड़ी चिंता भी है.
निकोलस ओटामेंडी और क्रिस्टियन रोमेरो जैसे मजबूत रक्षकों से सजी डिफेंस लाइन बेहद आक्रामक है, लेकिन उच्च स्तर के फुल-बैक्स की कमी कोच के लिए सिरदर्द बन सकती है.
युवाओं का नया जोश और बड़े फैसले
कोच लियोनेल स्कालोनी ने इस बार टीम में कुछ चौंकाने वाले बदलाव किए हैं. टीम में निको पाज़ और वैलेंटिन बारको जैसे उभरते सितारों को जगह मिली है, जिन्होंने हाल के सत्रों में यूरोपीय क्लबों के लिए बेहतरीन खेल दिखाया है. हालांकि, रियल मैड्रिड के लिए कमाल का प्रदर्शन करने वाले 18 वर्षीय फ्रेंको मस्तानतुओनो और चेल्सी के आक्रामक विंगर अलेजांद्रो गार्नाचो को टीम में शामिल न करके स्कालोनी ने सभी को हैरान कर दिया.
इसके बावजूद अर्जेंटीना का मिडफील्ड लिवरपूल के एलेक्सिस मैक एलिस्टर और चेल्सी के एन्जो फर्नांडीज की मौजूदगी के कारण बेहद संतुलित और रचनात्मक दिखाई देता है. वहीं अग्रिम पंक्ति में लाउतारो मार्टिनेज और जूलियन अल्वारेज़ जैसे फॉर्म में चल रहे स्ट्राइकर्स विपक्षी टीमों के लिए बड़ा खतरा साबित होंगे.
ग्रुप-जे की चुनौती और स्कालोनी की रणनीति
कागज पर अर्जेंटीना के लिए ग्रुप-जे काफी आसान नजर आ रहा है, लेकिन टीम कतर विश्व कप में सऊदी अरब के खिलाफ मिली शुरुआती हार की कड़वी यादों को नहीं भूली होगी. अर्जेंटीना अपने अभियान की शुरुआत 16 जून को कैनसस सिटी में अल्जीरिया के खिलाफ करेगा. इसके बाद 22 जून को उसका सामना ऑस्ट्रिया से होगा, जो किसी भी बड़ी टीम को उलटफेर का शिकार बनाने का माद्दा रखती है.
ग्रुप का आखिरी मैच 27 जून को पहली बार विश्व कप खेल रहे जॉर्डन के खिलाफ होगा. अगर शुरुआती दो मैचों में अर्जेंटीना अपनी स्थिति मजबूत कर लेता है, तो कोच स्कालोनी अपने सीनियर खिलाड़ियों को आराम देने का जोखिम उठा सकते हैं.
स्कालोनी की देखरेख में अर्जेंटीना ने दो कोपा अमेरिका और एक विश्व कप जीता है, और यदि वे इस बार भी सफल होते हैं, तो वे इतिहास के सबसे महान प्रबंधकों की सूची में शामिल हो जाएंगे.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अर्जेंटीना आसानी से सेमीफाइनल तक का सफर तय कर सकता है, लेकिन खिताब तक पहुंचने के लिए उसे स्पेन और फ्रांस जैसी युवा और बेहद आक्रामक टीमों की कड़ी चुनौती को पार करना होगा.