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अब फोन पर दिखेगा कॉलर का असली नाम: DoT लागू करेगा CNAP

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03 दिस. 2025, 08:18 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

मोबाईल फोन
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नई दिल्ली । डेस्क: दूरसंचार विभाग (DoT) अगले कुछ महीनों में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. अब देश के सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को इनकमिंग कॉल करने वाले भारतीय फ़ोन नंबरों का KYC-पंजीकृत नाम दिखाना अनिवार्य होगा. यह सुविधा, जिसे कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) के नाम से जाना जाता है, वर्तमान में केवल हरियाणा में ट्रायल के तौर पर चल रही है.


CNAP फीचर उसी तकनीक का उपयोग करेगा जिसका इस्तेमाल रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसे ऑपरेटर्स 'संदिग्ध' या 'स्पैम' कॉल को फ़्लैग करने के लिए करते हैं. हालांकि, इसमें उन शब्दों के बजाय, कॉलर आईडी पर वह नाम दिखाई देगा जिसके साथ नंबर पंजीकृत किया गया था.

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2022 से प्रस्तावित यह कदम, धोखाधड़ी और स्पैम कॉल्स से लड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इससे उपयोगकर्ता कॉल का जवाब देने से पहले ही उसे स्क्रीन कर सकेंगे. यह कदम अन्य देशों की तुलना में काफी आक्रामक है, क्योंकि कतर जैसे देशों ने इसे केवल कॉर्पोरेट्स के लिए अनिवार्य किया है.


यह सुविधा डिफ़ॉल्ट रूप से सक्षम होगी, यानी सभी उपयोगकर्ताओं को स्वचालित रूप से कॉलर का KYC नाम दिखेगा. हालांकि, उपयोगकर्ताओं को कॉल प्राप्त करने वाले लोगों का नाम देखने की सुविधा को अक्षम करने का विकल्प मिल सकता है. अपना नाम छुपाने का विकल्प (छिपी हुई लाइन सुविधा) केवल मंत्रियों और शीर्ष सरकारी अधिकारियों जैसे प्रतिबंधित लाइन सुविधा उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगा.


DoT और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का मानना है कि इस कदम से स्कैमर्स और स्पैम कॉल करने वालों के लिए अपने कॉल्स का जवाब पाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि अब सभी कॉल प्राप्तकर्ता यह जान सकेंगे कि इनकमिंग कॉल किस नंबर से आ रहा है.


इंडस्ट्री बॉडी सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI), जो एयरटेल, जियो और वीआई का प्रतिनिधित्व करता है, ने 2022 में इस कदम का समर्थन करते हुए भी चिंता व्यक्त की थी कि "कुछ वास्तविक मामले हो सकते हैं जिनमें उपयोगकर्ता अपना नाम साझा करने के इच्छुक न हों."


इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन जैसे अन्य इंडस्ट्री समूहों और एक नागरिक समाज संगठन ने भी विशेष रूप से महिलाओं के लिए गोपनीयता संबंधी चिंताएँ उठाई थीं.


हालांकि, DoT ने इस बात पर जोर दिया है कि यह केवल कॉल करने वालों की पहचान उजागर करेगा, न कि कॉल प्राप्त करने वालों की. DoT ने यह भी कहा कि गोपनीयता की चिंताओं को 2024 में TRAI ने खारिज कर दिया था, और इस बात की ओर इशारा किया कि कॉलर लाइन आइडेंटिफिकेशन रेस्ट्रिक्शन (CLIR) नामक एक सुविधा मौजूद है, जिसके तहत शीर्ष सरकारी अधिकारी, मंत्री, राष्ट्रपति और खुफिया एजेंसियाँ अपनी पहचान छिपा सकती हैं.


TRAI ने पहले ऑप्ट-इन दृष्टिकोण की सिफारिश की थी, लेकिन DoT ने इसे डिफ़ॉल्ट रूप से लागू करने का सुझाव दिया. TRAI ने बाद में इस इनपुट को "नोट" कर लिया, जिससे CNAP के रोलआउट का रास्ता साफ हो गया. फीचर हैंडसेट पर इस सुविधा को लाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा विचार किया जाएगा. (Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP