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सहारनपुर कलेक्टरेट परिसर में बनी मस्जिद पर चला बुलडोजर

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05 सित. 2026, 07:44 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

 मस्जिद पर चला बुलडोजर
मस्जिद पर चला बुलडोजर

सहारनपुर । डेस्क: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्टरेट परिसर स्थित एक पुरानी मस्जिद पर शनिवार को प्रशासन का बुलडोजर चला दिया गया. अदालत के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा सियासी बवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ जहां कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को संविधान की धज्जियां उड़ाना बताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है, वहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी ने आरोप लगाया है कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए रातभर उनके घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर नजरबंद रखा गया.


अपील खारिज होते ही चला बुलडोजर


प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध घोषित किया था. इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने अपील दाखिल की थी, जिसे 4 सितंबर को खारिज कर दिया गया. अपील खारिज होते ही शनिवार तड़के भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया. इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रखने के लिए पीएसी और आरएएफ की अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं. पूरे इलाके और सोशल मीडिया पर प्रशासन पैनी नजर बनाए हुए है.


इमरान मसूद बोले- सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे कानूनी लड़ाई


सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी को उच्च अदालतों में अपील करने का पर्याप्त मौका दिए बिना ही जल्दबाजी में यह कार्रवाई की गई है. मसूद का दावा है कि जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड में आज भी पुराने मालिकों के नाम दर्ज हैं और यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है. उन्होंने सवाल उठाया कि वक्फ बोर्ड को इस कानूनी प्रक्रिया में पक्षकार तक नहीं बनाया गया.


सांसद इकरा चौधरी को घर से निकलने से रोका


इस विवाद का दायरा तब और बढ़ गया जब कैराना से सपा सांसद इकरा चौधरी ने प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में अधिकारियों से मिलने और जनता की चिंताएं जताने सहारनपुर जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी चुने हुए जन प्रतिनिधि का अधिकारियों से मिलकर जनता की बात रखना अपराध हो गया है.


6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे और सुरक्षा कारणों का दिया हवाला


यह पूरा विवाद 17 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना और हर्जाना ठोका गया था. यह मामला बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कलेक्टरेट परिसर के भीतर अवैध रूप से ढांचा खड़ा कर कमरे किराए पर दिए जा रहे थे. प्रशासन ने कलेक्टरेट परिसर की सुरक्षा और गोपनीयता को खतरा बताते हुए इस ढाँचे को हटाने का फैसला सही ठहराया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP