मानसिक अक्षम महिला से हैवानियत: दोषी की उम्रकैद पर HC की मुहर
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक 55 वर्षीय मानसिक रूप से अक्षम और बेसहारा महिला के साथ यौन उत्पीड़न और उसकी हत्या के दोषी व्यक्ति की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली आरोपी की अपील को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की.
न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि मानवीय गरिमा, शारीरिक अखंडता और कानून के शासन पर एक "गंभीर प्रहार" है.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़ित महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ और अत्यंत असुरक्षित स्थिति में थी, जिसे समाज के संरक्षण और देखभाल की आवश्यकता थी. इसके विपरीत, आरोपी ने उसकी विवशता का लाभ उठाते हुए अपनी कामुकता की पूर्ति के लिए उस पर "अमानवीय हिंसा" की.
हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को, चाहे वह कितना भी असहाय या मानसिक रूप से अस्वस्थ क्यों न हो, जीवन और गरिमा का समान अधिकार देता है.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 5 अप्रैल 2022 की है. सीसीटीवी फुटेज से यह खुलासा हुआ था कि आरोपी ने देर रात महिला को जबरन पकड़ा, उसे सुनसान जगह पर घसीटा और उसके साथ बर्बरता की.
फुटेज में यह भी देखा गया कि आरोपी ने महिला के बाल पकड़कर उसे घसीटा और उसके सिर को पत्थर पर दे मारा, जिससे मस्तिष्क में गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मृत्यु हो गई.
ट्रायल कोर्ट ने नवंबर 2023 में आरोपी को "प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद" की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट ने इस सजा को सही ठहराते हुए कहा कि ऐसे जघन्य कृत्यों में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना न्याय की विफलता होगी.
अदालत ने 'विल्स सरकमस्टेंशियल एविडेंस' का हवाला देते हुए माना कि सीसीटीवी फुटेज और चिकित्सा साक्ष्य आरोपी के अपराध की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त हैं. न्यायालय ने यह संदेश भी दिया कि आपराधिक न्याय प्रणाली को ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि समाज में एक निवारक प्रभाव पैदा हो सके.