बॉम्बे हाईकोर्ट का विरोध प्रदर्शनों पर 'ब्लैंकेट ऑर्डर' से इनकार
मुंबई । डेस्क: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों की पुलिस हिरासत पर कोई भी सामान्य या 'ब्लैंकेट ऑर्डर' जारी करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता किसी विशिष्ट अवैधता या गलत कार्रवाई को सामने लाते हैं, तो उस पर सख्त कदम उठाया जाएगा.
यह सुनवाई अधिवक्ता सागर देवरे द्वारा दायर उस याचिका पर हो रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मुंबई पुलिस ने वीकेंड पर दिल्ली के प्रदर्शनों के समर्थन में शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे सैकड़ों लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील मनीष तोमर ने आगे होने वाले प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई पर रोक की मांग की थी.
हालांकि, अदालत ने कहा कि वह पुलिस पर बिना किसी ठोस उदाहरण के इस तरह का व्यापक प्रतिबंध नहीं लगा सकती. राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने पर हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 अक्टूबर तय की है.
दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े एक अन्य मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने तर्क दिया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम न होने का मतलब यह नहीं है कि नाम हटा दिया गया है.
आयोग के अनुसार, एसआईआर एक नई मतदाता सूची तैयार करने की गहन प्रक्रिया है, जो मौजूदा सूची को अपडेट करने वाली सामान्य प्रक्रिया (SSR) से अलग होती है. यह याचिका एक ही परिवार के सात सदस्यों का नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब होने पर दायर की गई थी.