माओवादियों का कभी गढ़ रहे 'काले पहाड़' अब बनेंगे पर्यटकों की पहली पसंद
रायपुर । संवाददाता: तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित 'कर्रेगुट्टालू हिल्स' (KGH), जो कभी सीपीआई (माओवादी) का अभेद्य किला मानी जाती थीं, अब जल्द ही आम जनता और पर्यटकों के लिए खुलने जा रही हैं. मुलगु जिले के घने जंगलों से होकर गुजरने वाली 29 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है, जिससे इस दुर्गम क्षेत्र तक पहुंच आसान हो जाएगी.
मुलगु के पुलिस अधीक्षक सुधीर रामनाथ केकन ने जानकारी दी कि तेलंगाना की ओर सड़क का केवल 1.5 किलोमीटर का हिस्सा शेष है और हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने ताड़पला पहाड़ियों तक चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया है.
'काले पहाड़' के नाम से मशहूर यह पर्वत श्रृंखला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, 15 से 20 चोटियों, झरनों, गुफाओं और संकरी घाटियों के लिए जानी जाती है, जहाँ का वातावरण गर्मियों में भी दक्षिण भारत के मशहूर हिल स्टेशन 'ऊटी' जैसा सुखद रहता है.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की राह आसान नहीं थी, क्योंकि सुरक्षा बलों को सड़क बनाने से पहले माओवादियों द्वारा बिछाए गए बारूदी सुरंगों (लैंडमाइंस) को साफ करना पड़ा था. साल 2025 में चले एक बड़े ऑपरेशन के बाद इस क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने यहाँ पर्यटन की संभावनाओं को तराशना शुरू किया.
इस नई सड़क से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय 'गोटी कोया' आदिवासी समुदाय को भी स्वास्थ्य, शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी.
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बोगथा जलप्रपात के निकट होने के कारण आने वाले समय में यह क्षेत्र एडवेंचर टूरिज्म और रॉक क्लाइंबिंग के लिए एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा.
सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए हाल ही में वेकटापुरम मंडल के पामुनुरु गांव में एक पुलिस चौकी की आधारशिला भी रखी गई है, ताकि इस सीमावर्ती क्षेत्र में शांति और विकास सुनिश्चित किया जा सके.