गुजरात निकाय चुनावों में भाजपा की जीत
गुजरात निकाय चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत: कांग्रेस का सूपड़ा साफ
अहमदाबाद । डेस्क: गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के घोषित नतीजों ने एक बार फिर राज्य में भारतीय जनता पार्टी के निर्विवाद वर्चस्व पर मुहर लगा दी है. भाजपा ने 'शहरीकरण को राजनीतिक इंजन' बनाने की अपनी रणनीति के दम पर 15 नगर निगमों में क्लीन स्वीप करते हुए विपक्षी खेमे में भारी हलचल पैदा कर दी है.
मंगलवार को आए परिणामों में भाजपा ने न केवल अपने पुराने गढ़ बचाए, बल्कि नए परिसीमन के बाद बनी नगरपालिकाओं और निगमों में भी प्रचंड जीत हासिल की. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 393 स्थानीय निकायों में से भाजपा ने 379 पर कब्जा जमाया है, जबकि कांग्रेस मात्र 6 और आम आदमी पार्टी 8 निकायों तक सिमट गई.
अंतिम तालिका पर नजर डालें तो भाजपा ने सभी 15 नगर निगमों, 84 में से 78 नगरपालिकाओं और 34 में से 33 जिला पंचायतों में जीत का परचम लहराया है. इसके अतिरिक्त, 260 तालुका पंचायतों में से 253 पर भाजपा का कब्जा रहा.
यह जीत भाजपा के उस सुव्यवस्थित नेटवर्क का परिणाम मानी जा रही है, जो पिछले एक दशक से राज्य में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को वोट बैंक में तब्दील करने पर केंद्रित है. विशेष रूप से वापी, पोरबंदर और मोरबी जैसे नए निगमों में भाजपा का प्रदर्शन एकतरफा रहा, जहां पार्टी ने लगभग सभी सीटें अपने नाम कीं.
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं रहा. कांग्रेस को जिला पंचायतों और नगरपालिकाओं में भारी नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि, आम आदमी पार्टी (आप) ने इस चुनाव में एक 'सरप्राइज फैक्टर' के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
भले ही सूरत नगर निगम में आप की सीटें 27 से घटकर 4 रह गईं, लेकिन पार्टी ने दक्षिण गुजरात के आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस और भाजपा दोनों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं.
'आप' ने नर्मदा जिला पंचायत पर ऐतिहासिक जीत हासिल की और अहमद पटेल के गृह जिले भरूच के वालिया और नेत्रंग तालुका में भी पैठ बनाई. इसके अलावा, सौराष्ट्र के विसावदर और भेसाण जैसे इलाकों में भी आप ने भाजपा से सत्ता छीन ली.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस जीत के पीछे शहरी क्षेत्रों का विस्तार और नए प्रशासनिक ढांचे का निर्माण है. पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल तक, राज्य में जिलों और नगर निगमों की संख्या में लगातार वृद्धि की गई है.
वर्तमान में गुजरात की लगभग 46 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है और सरकार का लक्ष्य इसे अगले दो दशकों में 75 प्रतिशत तक ले जाने का है.
यही कारण है कि भाजपा पारंपरिक शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अब अर्ध-शहरी (पेरी-अर्बन) क्षेत्रों में भी अजेय होती जा रही है. रविवार को हुए मतदान में भारी उलटफेर के बीच, मतदाताओं ने साफ कर दिया है कि वे विकास और शहरीकरण के एजेंडे के साथ हैं. जहां कांग्रेस अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, वहीं आप के उभरते ग्राफ ने भविष्य के विधानसभा चुनावों के लिए त्रिकोणीय मुकाबले की नींव रख दी है.