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चुनावी चंदे में भाजपा की भारी बढ़त, कांग्रेस से 12 गुना ज्यादा

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22 दिस. 2025, 06:25 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

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नई दिल्ली । डेस्क: भाजपा को वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 6,088 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,967 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना अधिक है. चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट और अंशदान रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा को मिला यह चंदा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तुलना में करीब 12 गुना ज्यादा है. 


जहां भाजपा के फंड में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, वहीं कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के चंदे में गिरावट दर्ज की गई है. कांग्रेस को इस साल महज 522.13 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1,129.66 करोड़ रुपये था.


फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना के बंद होने के बाद इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से मिलने वाले चंदे में बड़ी उछाल आई है. 


इसमें 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' सबसे बड़ा दानदाता बनकर उभरा है, जिसने पिछले वित्त वर्ष में 15 राजनीतिक दलों को कुल 2,668 करोड़ रुपये वितरित किए. 


भाजपा को इलेक्टोरल ट्रस्ट से 3,142.65 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. अन्य दानदाताओं में कॉरपोरेट घराने, व्यक्तिगत दानदाता और विभिन्न संस्थान शामिल हैं.


रिपोर्ट के अनुसार, चंदा प्राप्त करने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC), बीआरएस (BRS), बीजेडी (BJD), टीडीपी (TDP) और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों को नुकसान हुआ है. 


टीएमसी का चंदा 646.39 करोड़ से घटकर 184.08 करोड़ रुपये रह गया, वहीं टीडीपी को मिलने वाली राशि भी 274.65 करोड़ से गिरकर 85.20 करोड़ रुपये पर आ गई. 


इसके विपरीत, जनता दल यूनाइटेड (JDU), समाजवादी पार्टी और सीपीआई (ML) जैसी पार्टियों के चंदे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जेडीयू का चंदा 4.35 करोड़ से बढ़कर 18.69 करोड़ रुपये हो गया है. 


खर्च के मामले में कांग्रेस ने 2024-25 के दौरान 1,111.94 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें से बड़ा हिस्सा यानी 896.22 करोड़ रुपये चुनावों पर खर्च हुए.


प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट


जब इलेक्टोरल बॉन्ड्स का चैप्टर बंद हो चुका है, तब राजनीतिक दलों के लिए प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट और भी महत्वपूर्ण हो गया है. सवाल सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि उस रास्ते का है, जिससे सत्ता और विपक्ष तक पैसा पहुंचता है. 2013 से अब तक इस ट्रस्ट ने किसे कितना चंदा दिया, किन कॉरपोरेट घरानों ने इसमें भूमिका निभाई, और इसकी कार्यप्रणाली कैसे लोकतंत्र को प्रभावित करती है?


वर्तमान में यह इंडिपेंडेंट प्रोफेशनल्स और ऑडिटर्स द्वारा संचालित होता है. ट्रस्ट के वर्तमान शेयरधारक और निदेशक (जो ट्रस्टी के रूप में कार्य करते हैं) हैं, उनमें मुकुल आनंद गोयल (Mukul Anand Goyal) और गणेश वी. वेंकटचलम (Ganesh V. Venkatachalam) के नाम प्रमुख हैं.


ये दोनों 2014 से निदेशक हैं. मूल रूप से भारती ग्रुप के कार्यकारी इसमें शामिल थे, लेकिन बाद में इसे स्वतंत्र दिखाने के लिए कुछ शेयरधारकों को ट्रासफर किया गया. इसके बाद भी हालांकि इसका असली कंट्रोल भारती ग्रुप के पास ही माना जाता है.


ट्रस्ट कॉर्पोरेट्स और व्यक्तियों से चंदा एकत्र करता है. इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम में कंपनियां या कोई व्यक्ति सीधा राजनीतिक दलों को फंड देता था, लेकिन यहां कंपनियां सीधे राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के बजाय इस ट्रस्ट में जमा करती हैं. ट्रस्ट को एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल चंदे का कम से कम 95 फीसदी हिस्सा राजनीतिक दलों को उसी वर्ष वितरित करना ही होता है. यह अनिवार्य नियम है.


प्रूडेंट ट्रस्ट को हर साल चुनाव आयोग (ECI) को अपनी योगदान रिपोर्ट (Contribution Report) सौंपनी होती है. इसमें डोनर का नाम और किस पार्टी को कितना पैसा दिया गया, इसका पूरा हिसाब होता है. दानदाताओं की पहचान ट्रस्ट की रिपोर्ट में सार्वजनिक होती है, लेकिन प्रत्येक दानदाता द्वारा दिए गए चंदे की रकम की जानकारी गोपनीय रहती है.


इकट्ठा किया गया फंड राजनीतिक दलों में बांटा जाता है. यह मुख्य रूप से चंदा देने वालों की इच्छा या ट्रस्ट के फैसले के आधार पर तय होता है कि किस राजनीतिक दल को कितना फंड दिया जाना है. अगर एक मोटे-मोटे आंकड़े की बात करें तो प्रूडेंट ने ऐतिहासिक रूप से लगभग 80 फीसदी फंड भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को दिया है. 


2024-25 में इसके प्रमुख दानदाताओं में भारती एयरटेल, डीएलएफ, हीरो मोटोकॉर्प, जुबिलेंट फूडवर्क्स, जेके टायर, इंडियाबुल्स, ओरिएंट सीमेंट और मेघा इंजीनियरिंग जैसी कंपनियां रही हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP