बिटकॉइन का दाम गिरा, निवेशकों का मोहभंग या अर्थव्यवस्था ढलान पर?
टकॉइन का दाम गिरा, निवेशकों का मोहभंग या अर्थव्यवस्था ढलान पर?
वाशिंगटन । डेस्क: दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के लिए यह हफ्ता बेहद भारी साबित हुआ है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. हालिया गिरावट के बाद बिटकॉइन की कीमतें गिरकर पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. शुक्रवार सुबह तक बिटकॉइन 62,900 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि गुरुवार दोपहर को यह 66,000 डॉलर के भी नीचे चला गया था.
इस डिजिटल एसेट में गिरावट का सिलसिला जनवरी के आखिरी हफ्ते से शुरू हुआ था, जब यह 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसला था. गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में बिटकॉइन ने 127,000 डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ था, लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. इस साल की शुरुआत से अब तक बिटकॉइन अपनी वैल्यू में लगभग 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज कर चुका है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं.
क्रिप्टो मार्केट में मची इस खलबली का एक मुख्य कारण वैश्विक शेयर बाजारों में हो रही बिकवाली है. भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सोने-चांदी की कीमतों में अस्थिरता ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स से दूर कर दिया है.
क्रिप्टोक्वांट की एक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थागत निवेशकों की मांग में बड़ी कमी आई है. विशेष रूप से अमेरिकी एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs), जो पिछले साल तक भारी मात्रा में बिटकॉइन खरीद रहे थे, अब उसे बेच रहे हैं.
डॉयचे बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि अक्टूबर 2025 की मंदी के बाद से इन फंडों से हर महीने अरबों डॉलर की निकासी हो रही है. केवल जनवरी 2024 में ही स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ से 3 अरब डॉलर से अधिक बाहर निकले हैं, जो इस बात का संकेत है कि पारंपरिक निवेशक अब क्रिप्टो बाजार से अपना मोह भंग कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और घटती लिक्विडिटी की वजह से बाजार में एक 'विशियस सर्कल' या दुष्चक्र बन गया है, जो कीमतों को और नीचे धकेल रहा है.
हालांकि, यह गिरावट तब हो रही है जब अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद 'क्रिप्टो-फ्रेंडली' नीतियों की उम्मीद की जा रही थी. ट्रंप ने अमेरिका को दुनिया की "क्रिप्टो राजधानी" बनाने और एक 'नेशनल स्ट्रैटेजिक क्रिप्टो रिजर्व' बनाने का वादा किया था, जिसमें बिटकॉइन और ईथर जैसी मुद्राओं को शामिल करने की योजना थी. यहां तक कि उनके परिवार की फर्म 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' ने अपना स्टेबलकॉइन 'USD1' भी लॉन्च किया है.
लेकिन राष्ट्रपति के व्यक्तिगत झुकाव और सहायक नीतियों के बावजूद, बाजार बाहरी दबावों और व्यापक आर्थिक कारकों से खुद को बचा नहीं पाया है. विश्लेषकों का यह भी मानना है कि फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष के रूप में केविन वॉरश की नियुक्ति और ब्याज दरों में बदलाव न होने की घोषणा ने भी बाजार की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है.
बिटकॉइन के साथ-साथ दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी ईथर में भी इस हफ्ते 19 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. बाजार के इस दौर को कई लोग 'क्रिप्टो विंटर' कह रहे हैं, जो एक ऐसी लंबी अवधि होती है जब कीमतें स्थिर रहती हैं या लगातार गिरती रहती हैं.
इससे पहले 2017-18 और 2022 में भी ऐसे दौर देखे गए थे. हालांकि, जानकारों का एक वर्ग अब भी आशान्वित है. उनका कहना है कि क्रिप्टो विंटर आमतौर पर 13 महीने तक चलती है और वर्तमान गिरावट में कुछ भी बुनियादी तौर पर गलत नहीं है. उनका मानना है कि बाजार में छाई यह निराशा जल्द ही खत्म होगी और क्रिप्टो मार्केट एक बार फिर मजबूती के साथ वापसी करेगा. फिलहाल, निवेशकों की नजरें वैश्विक हालातों और अमेरिकी नियामक फ्रेमवर्क पर टिकी हैं कि क्या 'बसंत' की शुरुआत जल्द होगी या अभी यह सर्दी और लंबी खिंचेगी.