बिहार चुनाव चरण-एक: 32% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले
पटना । डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में उतरने वाले उम्मीदवारों के बीच आपराधिक पृष्ठभूमि का बोलबाला बना हुआ है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 1,303 उम्मीदवारों में से 32 प्रतिशत (423 उम्मीदवार) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.
इनमें से 27 प्रतिशत (354 उम्मीदवार) पर गंभीर अपराध जैसे हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं.
रिपोर्ट में 1,314 उम्मीदवारों में से 1,303 के शपथ-पत्रों का विश्लेषण किया गया है. इनमें 33 उम्मीदवारों पर हत्या के मामले हैं, जबकि 86 पर हत्या के प्रयास के आरोप हैं. महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले 42 उम्मीदवारों पर दर्ज हैं, जिनमें दो उम्मीदवारों पर बलात्कार के आरोप भी शामिल हैं. यह आंकड़ा लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने वाला चिंताजनक संकेत माना जा रहा है.
राजनीतिक दलों के स्तर पर स्थिति और भी गंभीर है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी सीपीआई(एमएल) के 14 उम्मीदवारों में से 93 प्रतिशत (13 उम्मीदवार) पर आपराधिक मामले हैं, जो सबसे अधिक है. इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 70 उम्मीदवारों में 76 प्रतिशत (53 उम्मीदवार) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 48 उम्मीदवारों में 65 प्रतिशत (31 उम्मीदवार) शामिल हैं.
अन्य प्रमुख दलों में स्थिति इस प्रकार है:
जन सुराज पार्टी के 114 उम्मीदवारों में 44 प्रतिशत (50) पर मामले.
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के 89 में 20 प्रतिशत (18).
जनता दल (यूनाइटेड) के 57 में 39 प्रतिशत (22).
आम आदमी पार्टी (आप) के 44 में 27 प्रतिशत (12).
कांग्रेस के 23 में 65 प्रतिशत (15).
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के 13 में 54 प्रतिशत (7).
सीपीआई के 5 में 100 प्रतिशत (5).
सीपीआई(एम) के 3 में 100 प्रतिशत (3).
एडीआर की यह रिपोर्ट बिहार चुनावी मैदान में अपराधीकरण की गहरी जड़ों को उजागर करती है. संगठन ने उम्मीदवारों के शपथ-पत्रों के आधार पर यह विश्लेषण किया है और अपील की है कि मतदाता इन आंकड़ों को ध्यान में रखकर वोट दें. पहले चरण के मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, ऐसे में यह रिपोर्ट राजनीतिक दलों के लिए एक कड़ा संदेश है. एडीआर के अनुसार, स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को बढ़ावा देकर ही लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है.