रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

बिहार में दलितों की उपेक्षा: शिक्षा-नौकरी-जमीन के मोर्चे पर हालात चिंताजनक

C

CG Khabar

09 अक्टू. 2025, 05:50 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

बिहार में दलित का घऱ जलाया
बिहार में दलित का घऱ जलाया

पटना । डेस्क: आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, राष्ट्रीय दलित और आदिवासी संगठन महासंघ (NACDOR) द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने राज्य में दलित समुदाय की बदहाल सामाजिक-आर्थिक स्थिति को उजागर किया है. "बिहार: व्हाट दलित्स वांट" शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक दलों द्वारा दलित हितों की बात करने के बावजूद, समुदाय शिक्षा, रोजगार और संसाधनों तक पहुँच के मामले में लगातार पिछड़ा हुआ है.


रिपोर्ट के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर बिहार में अनुसूचित जाति (SC) की साक्षरता दर 56 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय दर (66 प्रतिशत) से काफी कम है. मुसहर समुदाय के हालात विशेष रूप से गंभीर हैं, जिनकी साक्षरता दर 20 प्रतिशत से भी नीचे है-जो देश के किसी भी जाति समूह में सबसे कम है.

विज्ञापन


प्रमुख आँकड़े और माँगें


रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले आँकड़े पेश किए गए हैं:


शिक्षा और रोजगार:

*बिहार की आबादी में दलितों का हिस्सा 19.65 प्रतिशत है, लेकिन उच्च शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी और छात्रों में उनकी हिस्सेदारी केवल 5.6 प्रतिशत है.


*सरकारी नौकरियों में, दलित कुल कर्मचारियों का केवल 1.3 प्रतिशत हैं, जबकि उनका हकदार कोटा 15 प्रतिशत है.


*रिपोर्ट ने अनुसूचित जाति उप-योजना (Scheduled Caste Sub-Plan) के तहत निगरानी तंत्र की कमी को जवाबदेही कमजोर होने का मुख्य कारण बताया है.


स्वास्थ्य:

*राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, 2019 से 2021 के बीच बिहार में दलितों के लिए शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 55 थी, जबकि राज्य का औसत 47 और राष्ट्रीय औसत 37 था.


*इसी अवधि में दलितों के लिए मातृ मृत्यु दर प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 130 थी, जबकि राज्य का औसत 118 और राष्ट्रीय औसत 97 था. खराब स्वच्छता, कुपोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भेदभाव ने स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाया है.


जमीन और बजट:

*बिहार की कुल 6.45 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि में से दलितों के पास केवल 0.57 मिलियन हेक्टेयर (10 प्रतिशत से कम) जमीन है.


*राज्य के बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (SC, ST और OBC) के लिए हिस्सा 2013-14 के 2.59 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में सिर्फ 1.29 प्रतिशत रह गया है.


2010 से 2022 के बीच, बिहार में दलितों के खिलाफ 85,684 अत्याचार के मामले दर्ज किए गए.


रिपोर्ट में राजनीतिक दलों से अपने घोषणापत्रों में शामिल करने के लिए 20 सूत्रीय मांगों का चार्टर भी दिया गया है. NACDOR ने मांग की है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाए जो SC, ST और OBC के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास की निगरानी करे. 


इसके अलावा, रिपोर्ट में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट के साथ शैक्षणिक समावेशन योजना और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में अत्याचारों की रोकथाम के लिए राज्य-स्तरीय निगरानी समिति के गठन की सिफारिश की गई है. 


रिपोर्ट में बिहार जाति सर्वेक्षण के अनुरूप सभी सरकारी भर्तियों और पदोन्नति में आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित करने और भूमिहीनों को आवास इकाइयों के निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने की मांग भी शामिल है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP