भोरमदेव शक्कर कारखाने को नर्सरी के लिए चाहिए जमीन
कवर्धा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में संचालित भोरमदेव शक्कर कारखाना अब खुद ही गन्ने के बीज तैयार करने की योजना बना रहा है. इसको लेकर कारखाना प्रबंधन ने सरकार से 19 एकड़ जमीन की मांग की है.
प्रबंधन का कहना है कि वह गन्ने की उत्तम किस्म के बीजों का उत्पादन करने के लिए नर्सरी तैयार करना चाहता है. नर्सरी में तैयार बीजों को किसानों में बांटने की योजना है.
कारखाना प्रबंधन ने बोड़ला राजस्व एसडीएम से ग्राम परसहा स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 107/1 के रकबा 3.502 हेक्टेयर व खसरा नंबर 101 के रकबा 4.216 हेक्टेयर भूमि को आवंटित किए जाने की मांग की है.
ये करीब 19 एकड़ भूमि है. इस पर राजस्व विभाग ने प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.
कारखाना प्रबंधन का कहना है कि कृषि भूमि की कमी की वजह से बड़े स्तर पर नए और उन्नत किस्म के बीज का उत्पादन नहीं हो रहा है.
नए और उन्नत किस्म के बीज नहीं मिलने से किसान भरपूर मात्रा में उत्पादन नहीं ले पा रहे हैं. उत्पादन कम होने से किसानों को लाभ भी कम हो रहा है.
8 साल से एक ही किस्म लगाते आ रहे किसान
बताया गया कि क्षेत्र के किसान पिछले 6 से 8 साल से 085 किस्म के गन्ने का उत्पादन कर रहे हैं और इसी को बेचते आ रहे हैं.
शुरूआती दिनों में इसका उत्पादन व रिकवरी ठीक थी. लेकिन लगातार एक ही किस्म के गत्रा की खेती होने से इसके उत्पादन और रिकवरी असर पड़ा.
इससे किसानों को नुकसान हो रहा है. वर्तमान में इस किस्म के गन्ने की रिकवरी मात्र 12 प्रतिशत रह गई है.
कारखाना प्रबंधन का कहना है कि जमीन मिलने पर नर्सरी में ज्यादा रिकवरी वाले गन्ने लगाए जाएंगे. इसके बाद इसे किसानों को दिया जाएगा. इसके किसानों के साथ ही कारखाने को भी फायदा होगा.
वर्तमान में गन्ने की ऐसी कई किस्में हैं, जो आज के समय में प्रति एकड़ 500 क्विंटल से ज्यादा का उत्पादन व 14 प्रतिशत से ज्यादा की रिकवरी देती हैं.
किसानों की घट रही संख्या
भोरमदेव शक्कर कारखाना में धीरे-धीरे गन्ना बेचने के लिए किसानों की संख्या घट रही है. साल 2023-24 के सीजन में गन्ना बेचने वाले किसानों की संख्या 12 हजार 52 थी. वहीं गन्ना उत्पादक गांवों की संख्या 285 थी. जबकि कारखाना में गन्ना पेराई कार्य दिवस 174 था.
वर्ष 2024-25 सीजन में गन्ना किसानों की संख्या घटकर 11 हजार 726, गन्ना उत्पादक गांवों की संख्या 255 व पेराई कार्य दिवस 108 दिनों में सिमट गया.
एथेनाल प्लांट को दी जमीन
भोरमदेव शक्कर कारखाना में पहले खुद की कृषि भूमि थी. जिसे कारखाना प्रबंधन ने चार साल पहले एथेनॉल प्लांट को दे दिया. जहां आज प्लांट संचालित है.
उस समय कारखाना प्रबंधन ने सिर्फ अपने फायदे पर ध्यान दिया. नर्सरी के बारे में सोचा ही नहीं. अब जब कारखाने में किसानों से गन्ना आना कम हुआ तो प्रबंधन को जमीन की याद आ रही है.
वर्तमान में कारखाने के पास गन्ना नर्सरी के लिए महज 2 एकड़ भूमि उपलब्ध है. इसी में ही नए किस्म के गन्ना बीज को लगाया जाता है.
वर्तमान समय में यहां 13002 व 13374 नामक गन्ने की किस्म को लगाया गया है. भूमि कम होने के कारण बड़े स्तर पर नए किस्म के बीज का उत्पादन नहीं हो रहा है.
इसे देखते हुए आने वाले समय में 19 एकड़ में नए किस्म का बीज लगाकर किसानों को दिए जाने की प्लानिंग है.