तमिलनाडु में बंगाली श्रमिक की संदिग्ध मौत, परिवार का दावा 'SIR का डर'
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान के जमालपुर के एक प्रवासी श्रमिक की तमिलनाडु में काम के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. शनिवार शाम को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा.
हालांकि, उनकी मौत कैसे हुई, इस पर संदेह बरकरार है. लेकिन, परिजनों का दावा है कि कथित तौर पर विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) की घोषणा की खबर सुनकर वह बीमार पड़ गए थे और इसी डर से उनकी मौत हुई.
मृतक की पहचान बिमल सांतरा (51) के रूप में हुई है, जो जमालपुर के नवग्राम के निवासी थे. परिवार के अनुसार, बिमल काम के सिलसिले में तमिलनाडु गए थे. 26 अक्टूबर को वह बीमार पड़ गए और वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया.
इलाज के दौरान गुरुवार को उनकी मृत्यु हो गई. उनके बेटे, बापी सांतरा, पिता की मौत की खबर मिलने पर तमिलनाडु गए और तंजावुर के ओरतनाडू पुलिस स्टेशन में संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कराया है.
बापी का कहना है कि उनके पिता धान रोपने के काम के लिए कुछ दिन पहले ही तमिलनाडु गए थे. एसआईआर की घोषणा की खबर सुनकर बिमल चिंतित हो गए थे.
उन्हें डर था कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची में उनका नाम रहेगा या नहीं. वह बार-बार इस बात का जिक्र करते थे.
बापी ने कहा, "उसी डर के कारण पिताजी बीमार पड़ गए थे. उसके बाद उनकी मौत हो गई." बिमल के शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार को हुआ.
बिमल की मौत से नवग्राम में शोक की लहर है. शनिवार शाम को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा.
खबर मिलने पर जमालपुर के विधायक अलोक मांझी और अन्य तृणमूल नेता बिमल के घर गए.
विधायक ने दावा किया कि राज्य में लगभग ढाई साल से 100 दिन का काम बंद है, जिसके कारण कई लोग दूसरे राज्यों में जा रहे हैं. बिमल भी गए थे. वहीं, एसआईआर की बात सुनकर वह चिंतित और भयभीत थे, जिसके कारण बीमार होकर उनकी मृत्यु हो गई.
तृणमूल सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर, जिला अध्यक्ष रवि चटर्जी और नेता स्वपन देवनाथ नवग्राम जाएंगे और बिमल के परिवार से मिलेंगे.
हालांकि, 'एसआईआर के डर' से मौत के दावे को बीजेपी ने मानने से इनकार कर दिया है. बीजेपी जमालपुर-1 मंडल के अध्यक्ष प्रधान चंद्र पाल ने कहा, "कोई भी मौत दुखद है. बिमल की मौत एसआईआर के कारण नहीं हुई है. यह किसी और कारण से हुई है. जमीन खो चुकी तृणमूल ऊल-जुलूल बातें कर रही है."
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उत्तर 24 परगना के पानीहाटी के निवासी प्रदीप कर ने भी एसआईआर के डर से आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के अनुसार, उनके 'सुसाइड नोट' में भी यही बात लिखी थी, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी थी.
इसके अलावा, कूचबिहार के दिनहाटा के निवासी खैरूल शेख के बारे में भी सुनने में आया कि उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया. परिवार का दावा है कि 2002 की मतदाता सूची में नाम की वर्तनी में गलती होने के कारण 60 वर्षीय खैरूल डरे हुए थे. एआईआर की घोषणा के बाद वह घबरा गए और जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया.
इतना ही नहीं, बीरभूम के इलमबाजार में भी एसआईआर के डर से एक बुजुर्ग की आत्महत्या की शिकायत सामने आई थी. पिछले गुरुवार को इलमबाजार के स्कूलबागान सुभाषपल्ली स्थित घर से क्षितीश मजूमदार नामक बुजुर्ग का शव फंदे से लटका हुआ मिला था.
परिवार का दावा है कि क्षितीश पिछले कुछ दिनों से एसआईआर को लेकर डरे हुए थे. 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं था और वह मुख्य रूप से इसी बात को लेकर चिंतित थे. पानीहाटी और बीरभूम के बाद, अब पूर्वी बर्धमान में भी एसआईआर के डर से संदिग्ध मौत की शिकायत सामने आई है.