बंगाल: यूनिवर्सिटी ट्रांसफर बिल पास, शिक्षकों के तबादले पर घमासान
कोलकाता । डेस्क: राज्य विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान भारी राजनीतिक घमासान और विपक्षी दलों के वॉकआउट के बीच 'इंटर यूनिवर्सिटी ट्रांसफर बिल, 2026' को 15 के मुकाबले 171 मतों से पारित कर दिया गया. इस नए विधेयक के लागू होने के साथ ही राज्य सरकार को पहली बार राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों और शिक्षकों का एक संस्थान से दूसरे संस्थान में तबादला करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा.
'नक्सलवाद' के सफाए के लिए जो जरूरी, वो करेंगे: मुख्यमंत्री
विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया कि इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों, विशेष रूप से जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) में अनुशासन कायम करना है. उन्होंने मुखर लहजे में कहा कि राज्य में 'नक्सलवाद' के बीजों को समाप्त करने के लिए सरकार कोई भी कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर इसे सत्ता का दुरुपयोग कहा जाता है तो उन्हें इसकी परवाह नहीं है, क्योंकि जनादेश के तहत सरकार के पास प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जो शिक्षक इन नियमों से असहमत हैं, वे अपने पदों से त्यागपत्र दे सकते हैं.
जादवपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों पर सीधा निशाना
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जादवपुर यूनिवर्सिटी के कुछ शिक्षक विद्यार्थियों को भटकाने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल करने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे जा रहे हैं और कुछ प्राध्यापक छात्रों को राजनीतिक रैलियों में ले जाने के जिम्मेदार हैं. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जो लोग छात्रों को इस तरह की विचारधारा की ओर धकेल रहे हैं, उन्हें कड़ा प्रशासनिक जवाब दिया जाएगा. मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेज थपथपाकर विधेयक का समर्थन किया.
नया कानून और बुनियादी ढांचे की बहस
उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने सदन में विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में दखल देना नहीं, बल्कि नवगठित विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाना है. उन्होंने बताया कि राज्य में पूर्व में स्थापित कई नए विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए पुराने एवं प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुभवी प्राध्यापकों की सेवाएं वहां ली जाएंगी.
विपक्ष और शिक्षक संघों ने जताई कड़ी आपत्ति
दूसरी ओर, विपक्षी सदस्यों और वामपंथी शिक्षक संघों ने इस कानून का तीव्र विरोध किया है. माकपा विधायक मोस्तफिजुर रहमान और आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और इसके जरिए सरकार के आलोचक शिक्षकों को निशाना बनाया जाएगा. शिक्षक संघों का तर्क है कि इस कदम से राज्य के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और उच्च शिक्षा के स्तर पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ेगा.